नेपाल में आई आपदा: बस 15 मिनट की देरी से बची पश्चिम बंगाल के शिक्षक दंपति की जान, परिवार ने ली राहत की सांस.

Nura Basta29 August 20263 min read15 viewsIndia
नेपाल में आई आपदा: बस 15 मिनट की देरी से बची पश्चिम बंगाल के शिक्षक दंपति की जान, परिवार ने ली राहत की सांस.

जिंदगी और मौत के बीच अक्सर बहुत छोटा फासला होता है और कई बार छोटी सी देरी भी इंसान की किस्मत हमेशा के लिए बदल देती है। नेपाल में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के दौरान कुछ ऐसा ही वाकया पश्चिम बंगाल के बसीरहाट इलाके के रहने वाले एक बुजुर्ग जोड़े के साथ सामने आया है। काठमांडू से आगे की यात्रा के लिए वाहन पकड़ने में महज 15 मिनट की देरी होना उस शिक्षक दंपति के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ और आज वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस घटना के सामने आने के बाद से उनके परिवार और स्थानीय लोगों में राहत का माहौल बना हुआ है और हर कोई ईश्वर का शुक्राना अदा कर रहा है।

कचहरीपाड़ा के रहने वाले हैं अनुकूल पोद्दार

पश्चिम बंगाल के बसीरहाट नगरपालिका के वार्ड नंबर 7 के अंतर्गत आने वाले कचहरीपाड़ा इलाके के निवासी अनुकूल पोद्दार पेशे से पूर्व स्कूल शिक्षक हैं। वे अपनी पत्नी रेबा पोद्दार के साथ छुट्टी बिताने और घूमने के उद्देश्य से नेपाल गए हुए थे। नेपाल में अचानक आई भारी तबाही और आपदा के बाद से अचानक ही इस दंपति का संपर्क उनके परिवार और परिजनों से पूरी तरह टूट गया था। अचानक संपर्क कट जाने के कारण घर के सदस्यों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। हर कोई उनकी सलामती को लेकर डरा हुआ था और लगातार उनके मोबाइल फोन पर संपर्क साधने का प्रयास कर रहा था, लेकिन लगातार कोशिशों के बावजूद किसी भी तरह की कोई जानकारी हाथ नहीं लग रही थी।

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ऐसे टला बड़ा खतरा और बची जान

कई दिनों के लंबे इंतजार और भारी मानसिक तनाव के बाद आखिरकार शुक्रवार की शाम को उस शिक्षक दंपति से परिवार का संपर्क स्थापित हो पाया। फोन पर अपने परिवार से लंबी बातचीत के दौरान अनुकूल पोद्दार ने बताया कि वे दोनों किसी बहुत बड़े खतरे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए हैं। उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जब वे काठमांडू से अपनी आगे की यात्रा के लिए वाहन में बैठने जा रहे थे, तब वे तय समय से करीब 15 मिनट की देरी से वहां पहुंचे थे। इसी छोटी सी देरी की वजह से वे अपनी पहली तय गाड़ी नहीं पकड़ सके और उन्हें मजबूरी में दूसरी गाड़ी में सवार होना पड़ा। उस समय की वह छोटी सी देरी उनके जीवन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला साबित हुई, जिसने उन्हें मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।

जल्द भारत लौटने की तैयारी में हैं दंपति

आपदा के उस डरावने माहौल को याद करके आज भी वह शिक्षक दंपति काफी ज्यादा भयभीत और सहमे हुए हैं। हालांकि, फोन पर बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके साथ यात्रा करने वाले अन्य सभी लोग भी सुरक्षित हैं और किसी को कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा है। कई दिनों तक चली गहरी चिंता के बाद अनुकूल पोद्दार और रेबा पोद्दार के सकुशल होने की खबर मिलने पर उनके घर के सदस्यों और पड़ोसियों ने चैन की सांस ली है। दंपति ने फोन पर यह भी जानकारी दी कि वे अब जल्द से जल्द भारत लौटने की पूरी तैयारी कर रहे हैं और उनके रविवार तक अपने घर सकुशल पहुंच जाने की पूरी उम्मीद है।

प्रशासनिक स्तर पर हो रही है वापसी की व्यवस्था

दूसरी तरफ, राज्य सरकार की तरफ से भी यह आधिकारिक घोषणा की गई है कि नेपाल में फंसे हुए राज्य के सभी नागरिकों को पूरी सुरक्षा के साथ उनके घर वापस लाया जाएगा और इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल के कुल 85 लापता पर्यटकों की जो सूची तैयार की गई थी, उसमें इस शिक्षक दंपति का नाम भी शामिल था, जिसके कारण परिजनों की धड़कनें लगातार बढ़ी हुई थीं। अब पूरा कचहरीपाड़ा इलाका बस यही प्रार्थना कर रहा है कि अनुकूल पोद्दार और रेबा पोद्दार के अलावा नेपाल की इस भयावह त्रासदी में फंसे अन्य सभी लोग भी जल्द से जल्द पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ होकर अपने घरों को लौट आएं।

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