नेपाल आपदा का बड़ा असर, 39 देशों के 590 नागरिक अभी भी लापता, भारत और चीन चला रहे रेस्क्यू

Sushma Kumari31 August 20263 min read12 viewsWorld
नेपाल आपदा का बड़ा असर, 39 देशों के 590 नागरिक अभी भी लापता, भारत और चीन चला रहे रेस्क्यू

नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और आपदा के बाद हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं और प्रशासनिक स्तर पर राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है। विदेश मंत्रालय से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रभावित इलाकों से अब तक 323 से अधिक विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन चिंता की बात यह है कि 39 देशों के करीब 590 विदेशी नागरिक अभी भी लापता हैं। इस बड़ी संख्या में लोगों के गायब होने के बाद सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए एक विशेष इमरजेंसी कंट्रोल रूम का गठन किया है, जो लगातार राहत एजेंसियों और लापता लोगों के परिवारों के बीच आपसी तालमेल बिठाने का काम कर रहा है।

टनल और सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत और चीन की टीमें उतरीं मैदान में

नेपाल सरकार के अनुरोध पर पड़ोसी देशों ने मदद का दायरा बढ़ा दिया है और सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत और चीन की विशेषज्ञ तकनीकी टीमें नेपाल पहुंच चुकी हैं। वर्तमान में भारत से 11 और चीन से 9 विशेषज्ञ नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर पूरी मुस्तैदी से रेस्क्यू अभियान को अंजाम दे रहे हैं। भारतीय बचाव दल मेलुंग यानी चिलिमे और स्याफ्रुबेसी क्षेत्र में मोर्चा संभाले हुए है, जबकि चीनी टीम अपर त्रिशूली-3ए प्रोजेक्ट की सुरंगों में बचाव कार्य में जुटी है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया की एक तकनीकी टीम को भी इस बचाव कार्य में लगाया गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत ने डीएनए विश्लेषण के जानकारों की एक टीम भी भेजी है, जिसमें 18 फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हैं और वे 29 अगस्त से नेपाल में लगातार काम कर रहे हैं।

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कई देशों से मिल रही राहत सामग्री और चिकित्सा उपकरण

आपदा के इस मुश्किल समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय नेपाल की मदद के लिए आगे आया है और भारत, चीन, जापान, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE, दक्षिण कोरिया जैसे देशों से भारी मात्रा में राहत सामग्री पहुंचाई जा चुकी है। भेजी गई सहायता सामग्री में ब्रिज यूनिट, पानी के फ्रीजर, बड़े जनरेटर सेट, सोलर लैंप, डीएनए टेस्टिंग किट, आपातकालीन राहत उपकरण, टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, जरूरी खाद्य सामग्री और जीवन रक्षक दवाइयां शामिल हैं। इसके अलावा म्यांमार, कतर, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया और सिंगापुर जैसे कई अन्य देशों से भी लगातार राहत सामग्री आने का सिलसिला जारी है। संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व खाद्य कार्यक्रम और यूनिसेफ जैसे बड़े वैश्विक संगठन भी इस संकट की घड़ी में नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और हरसंभव मदद पहुंचा रहे हैं।

शवों की पहचान के लिए लिए गए डीएनए सैंपल

लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण कई मृतकों के शव इस स्थिति में पहुंच चुके हैं कि उनकी सामान्य पहचान करना असंभव हो गया है। ऐसे मामलों में प्रशासनिक और मेडिकल टीमों ने पूरी संवेदनशीलता और तय नियमों के तहत प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उन शवों को अस्थायी रूप से दफना दिया है। हालांकि, दफनाने से पहले मेडिकल टीमों ने हर एक मृतक का डीएनए सैंपल सुरक्षित रख लिया है, ताकि भविष्य में लापता लोगों के परिजनों के डीएनए रिकॉर्ड से मिलान कर उनकी सही पहचान सुनिश्चित की जा सके। जरूरत पड़ने पर धार्मिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों को पूरा करने के लिए परिजनों के अनुरोध पर शवों को कब्र से बाहर निकालने की अनुमति भी दी जाएगी।

बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए होगी अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत

बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की वजह से नेपाल के अंदर घरों, मुख्य सड़कों, पुलों और कई बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे देश की आर्थिक कमर टूट गई है। नुकसान का शुरुआती आकलन किया जा रहा है और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट किया जाएगा ताकि वास्तविक क्षति का सटीक आंकड़ा सामने आ सके। बुनियादी ढांचे के भारी विध्वंस को देखते हुए नेपाल को आने वाले दिनों में इनके पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय सहायता की आवश्यकता पड़ने की पूरी संभावना है। देश के प्रधानमंत्री खुद व्यक्तिगत तौर पर इस पूरे राहत, बचाव और समन्वय अभियान की पल-पल की निगरानी कर रहे हैं और संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं।

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