नेपाल आपदा: 2.5 करोड़ घन मीटर बर्फ गिरने से हुआ बम जैसा धमाका, वैज्ञानिक हैरान

नेपाल के रसुवागढ़ी इलाके में हुई भयानक प्राकृतिक आपदा ने सबको चौंका दिया है। यहाँ 2.5 करोड़ घन मीटर बर्फ और बड़े-बड़े हिमखंड करीब 2,000 मीटर नीचे आ गिरे, जिससे इलाके में भारी तबाही मच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि बर्फ गिरने की इस घटना से इतनी अधिक ऊर्जा पैदा हुई कि उसका असर किसी बम विस्फोट जैसा था। इस खतरनाक घटना ने आसपास के इलाकों में लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है और वैज्ञानिक लगातार इस पर नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की चौंकाने वाली रिसर्च
त्रिभुवन विश्वविद्यालय के भूगर्भशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. रंजन कुमार दाहाल इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं। उनके साथ चीन के शंघाई स्थित टोंगजी विश्वविद्यालय, ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, किंग्स कॉलेज लंदन और इटली के पादुआ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भी पिछले एक साल से हिमालयी क्षेत्रों की गतिविधियों का अध्ययन कर रहे थे। वैज्ञानिकों की इस टीम ने पाया कि रसुवागढ़ी के ऊपरी तिब्बती इलाके में स्थित प्यूरेपु हिमताल के ग्लेशियर पर बने छोटे-छोटे तालाब अचानक फट गए थे। इसी वजह से पिछले साल भी भोटेकोशी नदी में भयंकर बाढ़ आई थी।
5.2 रिक्टर स्केल का दर्ज हुआ था कंपन
सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि यह हिमस्खलन करीब 1.3 किलोमीटर लंबा था। इसने नीचे की तरफ करीब 500 से 800 मीटर के दायरे को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया और रास्ते में आने वाली हर चीज को साफ कर दिया। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब इतनी भारी मात्रा में बर्फ नीचे गिरी तो उससे पैदा होने वाली ऊर्जा से जमीन में तेज कंपन महसूस हुआ। इस कंपन को रिक्टर स्केल पर 5.2 तीव्रता के भूकंप के रूप में दर्ज किया गया था। हालांकि वैज्ञानिक अभी बर्फ के ढेर की असली मोटाई पूरी तरह नहीं माप पाए हैं, लेकिन शुरुआती अनुमान के मुताबिक गिरा हुआ बर्फीला ढेर करीब 60 से 70 मीटर मोटा था।
कितना बड़ा है बर्फ का यह विशाल ढेर
बर्फ के इस विशाल आयतन को आम भाषा में समझें तो यह इतना ज्यादा है कि इससे लंदन के प्रसिद्ध वेम्बली स्टेडियम को करीब 22 बार भरा जा सकता है। इसके अलावा, यह मात्रा मिस्र के ऐतिहासिक पिरामिडों से लगभग 10 गुना ज्यादा है। कई अन्य विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि शुरुआती अनुमान भले ही 2.5 करोड़ घन मीटर का हो, लेकिन असलियत में नीचे गिरी बर्फ की मात्रा इससे कहीं ज्यादा यानी करीब 10 करोड़ घन मीटर तक भी हो सकती है। इस विनाशकारी घटना के बाद से नेपाल के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गए हैं।