नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने भारत और पीएम मोदी का जताया आभार, दिया बड़ा बयान.

Sushma Kumari18 September 20263 min read32 viewsIndia
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने भारत और पीएम मोदी का जताया आभार, दिया बड़ा बयान.

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वहां की सरकार और भारत के आम नागरिकों का दिल से शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने यह आभार नेपाल में आए भयानक बाढ़ और आपदा के बाद भारत सरकार की तरफ से मिले भारी समर्थन के लिए जताया है। नेपाल इन दिनों देश में बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद जुटाने में लगा हुआ है। इस दौरान भारत की तरफ से मिला सहयोग नेपाल के लिए बेहद मददगार साबित हुआ है, जिसे लेकर वहां के मंत्री ने अपनी बात खुलकर रखी है।

भयानक बाढ़ और नुकसान का आकलन

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए स्वर्णिम वाग्ले ने बताया कि जैसे साल 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के समय भारत ने नेपाल का साथ दिया था, वैसे ही इस बार भी भारत मदद के लिए सबसे आगे आया है। नेपाल में जलवायु परिवर्तन के कारण आई इस भयानक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में करीब 1,400 लोगों की मौत हो चुकी है और 5,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में लगभग 190 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इस आपदा की वजह से लोगों की आजीविका उजड़ गई है और देश को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

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नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी द्वारा किए गए शुरुआती नुकसान के आकलन के अनुसार, देश को लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर का सीधा नुकसान हुआ है और इसके अलावा 1 अरब अमेरिकी डॉलर के अन्य नुकसान का अनुमान लगाया गया है। आने वाले कुछ वर्षों में 'बिल्ड बैक बेटर' यानी बेहतर तरीके से पुनर्निर्माण करने की कुल लागत 4.5 अरब से 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है। नेपाल के प्रधानमंत्री बलें शाह और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद नेपाल को भारत से भविष्य में भी ऐसे ही सहयोग की पूरी उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद की तैयारी और विदेश दौरा

जब वित्त मंत्री से यह पूछा गया कि क्या नेपाल को भारत से किसी खास वित्तीय मदद की उम्मीद है, तो उन्होंने साफ किया कि वे इस पर कोई निश्चित आंकड़ा तय नहीं करना चाहते। उन्होंने पुराने समय को याद करते हुए बताया कि साल 2015 के भूकंप के समय जब नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से करीब 4 अरब डॉलर की मांग की थी, तब अकेले भारत ने 1 अरब डॉलर की सबसे बड़ी सहायता दी थी जिसमें 25 प्रतिशत अनुदान यानी ग्रांट शामिल था और बाकी पैसा रियाद दरों पर लोन के रूप में था। नेपाल इस बार भी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए नए और रचनात्मक वित्तीय रास्ते तलाश रहा है।

अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा की शुरुआत करते हुए स्वर्णिम वाग्ले सबसे पहले नई दिल्ली पहुंचे। इसके बाद वे दोहा जाएंगे और फिर एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद वे न्यूयॉर्क और वाशिंगटन डीसी की यात्रा करेंगे जहां विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण चर्चा होगी। अक्टूबर के महीने में वे बैंकॉक में होने वाली ब्रिट्स वुड संस्थाओं की वार्षिक बैठक में भी हिस्सा लेंगे। उनकी इन सभी यात्राओं का मुख्य उद्देश्य दुनिया को यह बताना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी आपदाएं कितनी खतरनाक होती जा रही हैं और इससे गरीब देशों पर कितना बुरा असर पड़ रहा है। इस पूरी खबर के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News पर जा सकते हैं।

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