Nepal Flash Flood: नेपाल में भयानक बाढ़ से तबाही, 1341 लोगों की मौत और हजारों लोग अभी भी लापता.

Aanya6 September 20262 min read32 viewsWorld
Nepal Flash Flood: नेपाल में भयानक बाढ़ से तबाही, 1341 लोगों की मौत और हजारों लोग अभी भी लापता.

नेपाल में पिछले महीने आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद अब भी बचाव और राहत कार्य लगातार जारी हैं। 6 सितंबर 2026 तक नेपाल आर्मी और आर्मड पुलिस फोर्स की टीमें त्रिशूल नदी के किनारे बने हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांटों में मलबे के बीच जीवित बचे लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। 26 अगस्त 2026 को तिब्बत में ल्हेंडे नदी के पास आए हिमस्खलन और चट्टान खिसकने की घटना के कारण यह भयंकर आपदा आई थी, जिसने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। 11:00 AM तक नेपाल में इस आपदा की वजह से पुष्टि किए गए मृतकों की संख्या 1,341 तक पहुंच चुकी है और हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल और तिब्बत दोनों क्षेत्रों को मिलाकर कुल मरने वालों का आंकड़ा 1,385 के पार हो गया है, जबकि 5,405 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। इस पूरी आपदा और राहत कार्यों के बारे में अधिक जानकारी ReliefWeb रिपोर्ट में दी गई है।

सरकार को हुआ भारी आर्थिक नुकसान

नेपाल सरकार के शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस प्राकृतिक आपदा से देश को लगभग 400 अरब रुपये का कुल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इस भयानक बाढ़ की वजह से त्रिशूल, देवीघाट, अपर त्रिशूल 3ए और 3बी समेत कुल 13 चालू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इसके कारण ग्रिड से 431 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता पूरी तरह से खत्म हो गई है। इसके अलावा निर्माण कार्य के चरण में चल रहे प्रोजेक्ट्स की 470 मेगावाट क्षमता को भी भारी नुकसान हुआ है। नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन यानी IPPAN द्वारा इस नुकसान का आकलन किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल की जलविद्युत विकास रणनीति में 'कैस्केड रिस्क' का खतरा बढ़ गया था, जिसके चलते पास-पास बने प्रोजेक्ट्स पानी और मलबे के दबाव के आगे एक के बाद एक फेल हो गए।

संकटग्रस्त क्षेत्र घोषित और राहत कार्य

ह्यूमैनिटेरियन कंट्री टीम की रिपोर्ट के अनुसार छह जिलों की 17 नगरपालिकाओं के 84,270 लोग सीधे तौर पर इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने इन सभी प्रभावित क्षेत्रों को तीन महीने की अवधि के लिए 'संकटग्रस्त क्षेत्र' घोषित कर दिया है। प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने इस आपदा के पीछे जलवायु परिवर्तन को मुख्य कारण बताया है और हिमालयी क्षेत्र में तापमान 1.8 डिग्री सेल्सियस बढ़ने की बात कही है। हाल ही में चलाए गए बचाव अभियानों के दौरान त्रिशूल 3ए सुरंग से 4 सितंबर को दो मजदूरों को जिंदा बाहर निकाला गया, जिससे लोगों को थोड़ी उम्मीद बंधी है। हालांकि बदल चुके भौगोलिक हालात और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी UNDP के शुरुआती अनुमान के मुताबिक लगभग 22 लाख टन मलबे के ढेर के कारण बचाव टीमों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अल जजीरा के रिपोर्टर टोनी चेंग इस पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जबकि यूएनएफपीए जैसी कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां प्रभावित इलाकों में मानवीय सहायता पहुंचा रही हैं।

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