नेपाल में भयानक बाढ़ का कहर, सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों लोग लापता, भारत के नागरिकों पर भी संकट.

नेपाल में 26 अगस्त 2026 से शुरू हुई भयानक और विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। Bhote Koshi River के इलाके में हालात बहुत ज्यादा खराब हो गए हैं, जहां सैटेलाइट तस्वीरों से पूरे गांवों, पुलों और जरूरी इमारतों के पूरी तरह बर्बाद होने की बात सामने आई है। इस आपदा की वजह से आम जनजीवन पूरी तरह से थम गया है और चारों तरफ सिर्फ बर्बादी का मंजर दिखाई दे रहा है। नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRRMA की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 579 लोगों की जान जाने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा 1,924 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में बचाव दल लगातार जुटे हुए हैं। लापता लोगों के इस बड़े आंकड़े में 517 विदेशी नागरिक और जलविद्युत परियोजनाओं पर काम करने वाले 933 मजदूर भी शामिल हैं। नेपाल पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, कम से कम 700 विदेशी नागरिक लापता लोगों की सूची में शामिल हैं और इस हादसे में 466 लोग घायल भी हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय नागरिकों पर भी पड़ा असर
पड़ोसी देश चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत में भी इस बाढ़ का असर देखने को मिला है, जहां चीनी अधिकारियों ने 5 से 7 लोगों की मौत की पुष्टि की है। इसके अलावा तिब्बत में 554 से 558 लोग लापता हैं, जिनमें 260 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। दुनिया भर के देशों पर पड़े इस असर के आकलन से पता चलता है कि इस आपदा में कम से कम 320 भारतीय नागरिक, कनाडा के 32 नागरिक और स्थायी निवासी, तथा 90 से ज्यादा अमेरिकी नागरिक भी लापता लोगों की लिस्ट में हैं। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड Crescent सोसाइटी के अनुसार, इस आपदा से कम से कम 93,000 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र यानी UN की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि राहत शिविरों और प्रभावित इलाकों में रहने वाले करीब 17,000 बच्चों को तुरंत मानवीय सहायता और खाने-पीने की चीजों की सख्त जरूरत है।
बुनियादी ढांचे और परियोजनाओं को भारी नुकसान
इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। बाढ़ के पानी के तेज बहाव में कुल 32 पुल और लगभग 25 मील लंबी सड़कें पूरी तरह बह गई हैं। इसमें Betrawati से लेकर Rasuwagadhi बॉर्डर क्रॉसिंग तक जाने वाला पूरा मुख्य रास्ता भी शामिल है, जिससे आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है। इसके साथ ही देश की ऊर्जा जरूरतों से जुड़ी 14 जलविद्युत और सोलर प्रोजेक्ट्स भी इस बाढ़ की चपेट में आए हैं, जिनकी कुल क्षमता 748 मेगावाट थी। इन प्रोजेक्ट्स के क्षतिग्रस्त होने से बिजली उत्पादन पर भी बड़ा असर पड़ा है। नेपाल सरकार इस समय देश की आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों के जरिए राहत और बचाव कार्यों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। विदेश मंत्री Shisir Khanal ने इस बात की पुष्टि की है कि जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय मदद भी स्वीकार की जा रही है और स्थिति से निपटने के लिए यूरोपीय संघ यानी EU की तरफ से 2 मिलियन यूरो की सहायता राशि मंजूर की गई है। इस बारे में अधिक जानकारी Ministry of Foreign Affairs Nepal की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है।
प्रशासन की चेतावनी और बचाव कार्य
नदी के ऊपर बने नए बैरियर लेक यानी झील पर लगातार नजर रख रहे प्रशासनिक अधिकारियों ने आने वाले दिनों में और अधिक बाढ़ आने का खतरा जताया है। इस संभावित खतरे को देखते हुए आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए चेतावनी जारी कर दी गई है और लोगों को लगातार निकाला जा रहा है। नेपाल सरकार की बाढ़ से जुड़ी ताजा स्थिति और राहत कार्यों की हर एक अपडेट को Official Government Portal पर साझा किया जा रहा है। इस पूरी आपदा से जुड़ी विस्तृत और जमीनी रिपोर्ट ReliefWeb Report पर भी उपलब्ध कराई गई है, जहां राहत और बचाव से जुड़े आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं। सेना और पुलिस के जवान दिन-रात एक करके फंसे हुए लोगों को निकालने और उन्हें सुरक्षित जगह पहुंचाने के काम में लगे हुए हैं।