नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 1252 लोगों की मौत और डीएनए जांच से हो रही मृतकों की पहचान।

Praggya Singh sabal3 September 20263 min read31 viewsWorld
नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 1252 लोगों की मौत और डीएनए जांच से हो रही मृतकों की पहचान।

नेपाल में पिछले दिनों आए भयानक फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ के बाद अब हालात को संभालने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। नेपाल में सुरक्षा एजेंसियां और फॉरेंसिक एक्सपर्ट लगातार बचाव और पहचान के काम में जुटे हुए हैं ताकि लापता लोगों और मृतकों का सही आंकड़ा सामने आ सके। सरकार द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों का आधिकारिक आंकड़ा अब बढ़कर 1,252 हो गया है। इसके अलावा करीब 4,216 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें लगभग 590 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। बचाव दल के लिए यह काम बेहद कठिन साबित हो रहा है क्योंकि मलबा हटाने और रास्तों को साफ करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर नेपाल-चीन सीमा के पास स्थित सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा जिले में।

डीएनए प्रोफाइलिंग के जरिए हो रही शवों की पहचान

आपदा के दौरान कई शव बुरी तरह से सड़ चुके हैं और उनकी पहचान करना आम तरीकों से मुमकिन नहीं बचा है। इस वजह से विशेषज्ञ अब डीएनए प्रोफाइलिंग को मुख्य तरीका बना रहे हैं और हड्डियों तथा दांतों के जरिए सैंपल जुटाए जा रहे हैं। फॉरेंसिक वैज्ञानिक निरंजन थापा छेत्री के अनुसार, लापता परिवारों का एक पूरा डीएनए डेटाबेस तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लग सकता है। अब तक कुल 897 डीएनए सैंपल उन अवशेषों से लिए जा चुके हैं जिन्हें बाद में दफना दिया गया था। सरकार ने विदेशी पीड़ितों की पहचान और उनके शवों को उनके देश भेजने के लिए एक कड़ा नौ-चरणीय प्रोटोकॉल लागू किया है, जिसके तहत पासपोर्ट का सत्यापन और संबंधित दूतावास के साथ पूरा तालमेल बिठाना अनिवार्य किया गया है। इस बारे में अधिक जानकारी नेपाल के विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट mofa.gov.np पर दी गई है।

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही है बड़ी मदद

नेपाल पुलिस, नेपाली सेना और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के साथ मिलकर काम करने के लिए दुनिया भर के कई देश आगे आए हैं। भारत की तरफ से एक 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम ने गत 1 सितंबर 2026 को नेपाल पहुंचकर मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा सिंगापुर पुलिस फोर्स और हेल्थ साइंसेज अथॉरिटी की एक विशेष टीम भी राहत कार्यों में हाथ बंटाने के लिए नेपाल पहुंच चुकी है, जैसा कि सिंगापुर पुलिस की वेबसाइट police.gov.sg पर बताया गया है। चीन और दक्षिण कोरिया की तरफ से भी डीएनए विशेषज्ञ और जरूरी राहत सामग्री भेजी गई है। एशियाई विकास बैंक यानी एडीबी ने राहत और बचाव कार्यों के लिए 5 मिलियन डॉलर की सहायता राशि मंजूर की है, जिसकी पुष्टि भारतीय न्यूज पोर्टल newsonair.gov.in की रिपोर्ट में की गई है।

संसद में दी गई जानकारी और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

नेपाल के प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने गत 2 सितंबर 2026 को संघीय संसद के सामने बचाव और राहत कार्यों की पूरी रिपोर्ट रखी। इसके अगले दिन यानी 3 सितंबर 2026 को विदेश मामलों के मंत्री शिशिर खनाल ने राजनयिकों के सामने स्थिति स्पष्ट की। इस आपदा की वजह से देश में बुनियादी ढांचे को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार कुल 31 मोटर योग्य पुल, 48 सस्पेंशन ब्रिज, 40 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़कें और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जिन परिवारों के लोग अभी तक नहीं मिले हैं और जिनके शव नहीं मिल पाए हैं, वे लोग परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार न हो पाने की वजह से सांकेतिक अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं।

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