नेपाल में भीषण बाढ़ का कहर, ग्लेशियर टूटने से 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत और हजारों लापता.

Nura Basta9 September 20263 min read34 viewsWorld
नेपाल में भीषण बाढ़ का कहर, ग्लेशियर टूटने से 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत और हजारों लापता.

नेपाल में आई भयंकर आपदा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लाँगटांग नेशनल पार्क में आंशिक ग्लेशियर टूटने की वजह से अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। 26 अगस्त 2026 को हुई इस घटना के बाद से लगातार हालात खराब होते जा रहे हैं और हर तरफ नुकसान ही नुकसान दिखाई दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक कम से कम 1,369 लोगों की जान जा चुकी है। आम जनता से लेकर अधिकारी वर्ग तक सभी इस कुदरती मार से काफी परेशान नजर आ रहे हैं और हालात सामान्य होने में काफी समय लगने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट और नुकसान

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA की रिपोर्ट के मुताबिक, इस भयंकर आपदा में 6,827 लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। इसके अलावा 5,132 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव दल लगातार जुटे हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि इस लापता सूची में 39 देशों के 587 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल सरकार के विदेश मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार (MOFA Nepal), इस आपदा की वजह से देश को कुल रू 400 बिलियन से ज्यादा का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। लगभग 7,500 घर पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुके हैं और करीब 20,000 अन्य घरों को भी काफी नुकसान पहुंचा है, जिससे लगभग 1.6 मिलियन लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।

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बच्चों और महिलाओं पर आपदा का बड़ा असर

संयुक्त राष्ट्र की बाल एजेंसी UNICEF के अनुमान के अनुसार, इस आपदा की चपेट में करीब 17,000 बच्चे आए हैं। इनमें से 540 बच्चे अपने माता-पिता से बिछड़ चुके हैं या अकेले रह गए हैं, जबकि रासुवा और नुवाकोट जिलों में 630 बच्चे अब भी लापता हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए यूएन रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर लीला पीटर्स याहिया ने 84,270 ऐसे लोगों की मदद के लिए US$49.6 मिलियन की फ्लैश अपील लॉन्च की है जिनकी पहचान सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों के रूप में हुई है। वहीं, यूएन वीमेन की एशिया और प्रशांत क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक क्रिस्टीन अरब ने चेतावनी दी है कि इस आपदा से 157,050 महिलाएं और लड़कियां प्रभावित हुई हैं, जिनके सामने शोषण और लैंगिक हिंसा का खतरा काफी बढ़ गया है (ReliefWeb Report)।

सरकार का फैसला और अंतरराष्ट्रीय मदद

हालात की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने 15 नगर पालिकाओं को अगले तीन महीने के लिए आपदा संकट प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संयुक्त राष्ट्र के लॉस एंड डैमेज फंड से जलवायु से जुड़े नुकसान के लिए $20 मिलियन की सहायता औपचारिक रूप से मांगी है, क्योंकि उनका कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय मदद इस तबाही के पैमाने के सामने बहुत कम है (MOFA Nepal Update)। कटे-छटे इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए वर्ल्ड फूड प्रोग्राम कार्गो ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। इसके अलावा जापान, यूरोपीय संघ, भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया से लगातार आपातकालीन अनुदान और तकनीकी सहायता मिल रही है ताकि राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।

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