Nepal Flash Floods: नेपाल में भयानक बाढ़ और भूस्खलन, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 49 समेत 288 भारतीय लापता.

नेपाल और तिब्बत सीमा पर बीते 26 अगस्त 2026 को आए भीषण फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ और मडस्लाइड की वजह से हालात बेहद खराब हो गए हैं। इस कुदरती आफत के बाद नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 270 तक पहुंच गई है, जिससे चारों तरफ अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेपाल और तिब्बत के बॉर्डर पर फंसे और लापता हुए 288 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इस हादसे ने भारत के कई राज्यों के परिवारों को गहरी चिंता में डाल दिया है, क्योंकि उनके अपने लोग यात्रा या काम के सिलसिले में वहां गए थे और अब उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।
तमिलनाडु के तीर्थयात्रियों की बढ़ी मुश्किलें और लापता लोगों का आंकड़ा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने इस बात की पुष्टि की है कि तमिलनाडु से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए दो अलग-अलग जत्थों के लोग इस आपदा की चपेट में आ गए हैं। सम्राट और फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल्स के जरिए यात्रा पर गए 37 और 49 तीर्थयात्रियों के समूहों में से कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि तमिलनाडु के 21 नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन इसके बावजूद सैकड़ों लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। लापता होने वालों में सिर्फ तीर्थयात्री ही नहीं, बल्कि अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले लोग भी शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, त्रिशुली-1 पावर प्रोजेक्ट के 73 वर्कर, पश्चिम बंगाल के 32 लोग, केरल के 33 यात्री, रिचा टोर्स के साथ यात्रा कर रहे 61 लोग और ईशा फाउंडेशन से जुड़े लगभग 77 से 80 श्रद्धालु भी शामिल हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि कुछ तीर्थयात्री उस समय फंस गए जब पानी का तेज सैलाब तिब्बत के जिरोंग इलाके में स्थित चीनी सरकारी आव्रजन यानी इमीग्रेशन ऑफिस से जा टकराया।
सरकार ने उठाया कदम, दिल्ली और चेन्नई में बनाए गए कंट्रोल रूम
अपनों की सलामती के लिए बेचैन परिवारों की मदद के लिए तमिलनाडु की सरकार ने नई दिल्ली में 24/7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है और साथ ही विशेष हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने मीडिया को बताया कि राज्य सरकार हर घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन पर कड़ी नजर बनाए हुए है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक भी आयोजित की गई थी। इसके अलावा चेन्नई से गए 49 लोगों का एक और समूह, जिसमें कांचीपुरम के निवासी भी शामिल हैं, बॉर्डर इमीग्रेशन ऑफिस के पास संपर्क टूटने के बाद से पूरी तरह से गायब है। कोयंबटूर से भी एक पांच सदस्यीय परिवार के लापता होने की खबर सामने आई है, जिनका इंतजार कर रहे परिवार वाले लगातार अधिकारियों से संपर्क साध रहे हैं।
भारतीय दूतावास की कोशिशें और भारत सरकार की तरफ से भेजी गई मदद
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि खराब मौसम और तबाही की वजह से कम्युनिकेशन लाइन्स पूरी तरह से ठप हो चुकी हैं, जिससे संपर्क साधने में भारी दिक्कत आ रही है। काठमांडू में स्थित भारतीय दूतावास और बीजिंग का मिशन मिलकर स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार तालमेल बिठा रहे हैं, ताकि चीनी सीमा की तरफ फंसे लगभग 200 भारतीयों तक मदद पहुंचाई जा सके। इस संकट की घड़ी में भारत सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए नेपाल के प्रभावित इलाकों के लिए अपने दो विमान रवाना किए हैं। इन विमानों में करीब 37.5 टन राहत सामग्री भेजी गई है, जिसमें खाने-पीने की जरूरी चीजें और मेडिकल सप्लाई शामिल हैं। इस पूरी स्थिति और राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी आप ANI News की रिपोर्ट में देख सकते हैं। वहीं परिवारों की चिंता और प्रशासन के ताजा अपडेट्स के बारे में अन्य जानकारियां UNI India के जरिए साझा की गई हैं। सरकार का पूरा फोकस इस समय सभी लापता नागरिकों को सुरक्षित ढूंढने और उन्हें उनके घरों तक वापस लाने पर टिका हुआ है।