Nepal Flood Crisis: नेपाल में प्राकृतिक आपदा से मची तबाही, बाढ़ और भूस्खलन में 903 लोगों की मौत, हजारों लोग अब भी लापता.

नेपाल में आए विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की वजह से आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और इस भयंकर आपदा में अब तक 903 लोगों की जान जा चुकी है। हिमालयी क्षेत्र में आए ग्लेशियर के फटने और 5.2 तीव्रता के भूकंपीय झटके के कारण यह भयंकर प्राकृतिक आपदा आई, जिससे नेपाल के कई जिले बुरी तरह प्रभावित हुए। इस बड़ी त्रासदी के बाद बचावकर्मियों ने राहत और तलाशी अभियान को बहुत तेज कर दिया है और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बाढ़ के पानी और मलबे ने लोगों के घरों को पूरी तरह तबाह कर दिया है, जिससे survivors को अब रहने और खाने जैसी बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे मजदूरों की तलाश जारी
आपदा के कारण रसुवा और नुवाकोट जिलों में कम से कम 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है, और आशंका जताई जा रही है कि वहां सुरंगों में 900 से अधिक लोग फंसे हुए हैं। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA के अनुसार, इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है, जबकि 592 विदेशियों समेत कुल 4,247 लोग अभी भी लापता हैं। एक स्थानीय निवासी ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उसने इस आपदा में अपना पूरा घर और वह जमा पूंजी खो दी जिसे उसने मेडिकल सर्जरी के लिए बचाकर रखा था। प्रभावित इलाकों में लोग अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं और प्रशासन राहत सामग्री बांटने का काम कर रहा है।
सेना का राहत और बचाव अभियान
नेपाल आर्मी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बसनेट ने जानकारी दी है कि इस संकट की घड़ी में करीब 21,000 सुरक्षाकर्मी खोज और राहत अभियानों में दिन-रात जुटे हुए हैं। सेना ने अब तक 411 एयर रेस्क्यू मिशन चलाए हैं और आसमान के रास्ते हेलीकॉप्टरों की मदद से 3,081 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। खराब मौसम और बेहद कठिन पहाड़ी रास्तों के बावजूद सेना और राहत दल लगातार फंसे हुए लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। देवीघाट जैसे प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों की सफाई और मलबے को हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि राहत सामग्री समय पर पहुंचाई जा सके।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही मदद
इस भीषण आपदा से निपटने के लिए नेपाल को कई देशों से मदद मिल रही है और सिंगापुर ने भी इस मुश्किल समय में हाथ बढ़ाया है। सिंगापुर के विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालाकृष्णन ने नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल से बात करके अपनी संवेदना व्यक्त की और मानवीय सहायता के साथ-साथ विशेष आपदा पीड़ित पहचान कर्मियों को भेजने की पुष्टि की है। इससे पहले सिंगापुर सरकार ने 28 अगस्त 2026 को 100,000 अमेरिकी डॉलर की शुरुआती सहायता राशि भी दी थी। इसके संबंध में विस्तृत जानकारी सिंगापुर विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर दी गई है। नेपाल के विदेश मंत्रालय द्वारा नागरिकों और विदेशी नागरिकों की सुरक्षा के लिए राहत कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिसकी जानकारी नेपाल विदेश मंत्रालय के प्रेस ब्रीफिंग में दी गई है। मृतकों की पहचान और शवगृहों की कमी जैसी लॉजिस्टिक समस्याओं से निपटने के लिए अधिकारी अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं, जैसा कि रिलीफवेब की रिपोर्ट में बताया गया है।