नेपाल में बाढ़ के बाद मंडराया बड़ा खतरा, सड़ने-गलने लगे शव और मवेशी, फैल सकती है भयंकर महामारी

Aanya30 August 20263 min read25 viewsWorld
नेपाल में बाढ़ के बाद मंडराया बड़ा खतरा, सड़ने-गलने लगे शव और मवेशी, फैल सकती है भयंकर महामारी

नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब एक और नया संकट खड़ा हो गया है, जिससे पूरे देश में दहशत का माहौल बन गया है। 30 अगस्त को सामने आई जानकारी के मुताबिक, बाढ़ के पानी में डूबकर जान गंवाने वाले इंसानों और हजारों पशुओं के शव अब खुले में पड़े-पड़े सड़ने और गलने लगे हैं। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि प्रभावित इलाकों में खतरनाक बीमारियां और संक्रामक रोग तेजी से फैलने की आशंका जताई जा रही है। इस गंभीर हालात को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते पुख्ता कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति एक बहुत बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

संक्रामक रोगों का बढ़ता खतरा और डॉक्टरों की चिंता

वरिष्ठ संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. शेरबहादुर पुन ने मीडिया से बातचीत में चिंता जाहिर करते हुए बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में चारों तरफ इंसानों और मवेशियों के शव इधर-उधर बिखरे हुए हैं। इन शवों के सड़ने से वातावरण दूषित हो रहा है, जिसके कारण हैजा, दस्त, स्क्रब टाइफस, रोटावायरस, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और ई, लेप्टोस्पायरोसिस, डेंगू, मलेरिया, त्वचा संबंधी संक्रमण और श्वसन संक्रमण जैसी खतरनाक बीमारियां फैलने का भारी खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बाढ़ का अनुमान तो किसी को नहीं था, लेकिन अब जिस तरह से बीमारियां पैर पसार सकती हैं, उसका अंदाजा साफ लगाया जा सकता है। इसलिए सरकार और आम जनता दोनों को बहुत अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

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विस्थापितों के रहने की व्यवस्था और लापरवाही

बाढ़ की मार झेल रहे बेघर लोग इस समय शिविरों में टेंट या खुले आसमान के नीचे सामूहिक रूप से रहने को मजबूर हैं। इन जगहों पर लोगों का खाना-पीना और रहना सब एक ही स्थान पर हो रहा है, जिससे संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेजी से फैल सकता है। डॉ. पुन के मुताबिक, यदि इन विस्थापित शिविरों में पीने का साफ पानी और खाने-पीने की जरूरी चीजों का वितरण सही तरीके से नहीं किया गया, तो स्थिति और भी ज्यादा बदतर हो जाएगी। इसके अलावा, रुके हुए पानी और गंदगी की वजह से मच्छरों और कीड़ों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियां आम लोगों को अपनी चपेट में आसानी से ले सकती हैं।

अस्पतालों की बदहाली और प्रशासनिक कदम

बाढ़ की वजह से प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा पूरी तरह तबाह हो चुका है। रसुवा और त्रिशूली अस्पताल को छोड़कर ज्यादातर स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र या तो पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं या फिर काम करने की स्थिति में नहीं हैं। हालांकि सेना, नेपाल पुलिस और स्वास्थ्य मंत्रालय मिलकर राहत शिविर चला रहे हैं, लेकिन घायलों और मरीजों की संख्या को देखते हुए ये इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुधा शर्मा ने भी इस बात पर जोर दिया है कि गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं पर इस समय विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि वे सबसे जल्दी संक्रमण का शिकार हो सकते हैं।

दूसरी तरफ, प्रशासन ने भी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए काम शुरू कर दिया है। नुवाकोट के प्रमुख जिला अधिकारी शम्भुप्रसाद रेग्मी ने जानकारी दी है कि त्रिशूली, बेत्रावती और विदुर जैसे इलाकों में मलबे के नीचे दबे मृत पशुओं को बाहर निकालकर उनका उचित प्रबंधन करने का काम शनिवार से शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही, संक्रमण रोकने के लिए प्रभावित जगहों पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी किया जा रहा है। सरकार और प्रशासन हरसंभव प्रयास कर रहे हैं ताकि इस भयानक आपदा के बाद किसी भी तरह की महामारी को फैलने से रोका जा सके।

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