नेपाल में ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1000 के पार पहुंची.

Nura Basta1 September 20263 min read23 viewsWorld
नेपाल में ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1000 के पार पहुंची.

नेपाल में हाल ही में आए भीषण जलप्रलय ने भारी तबाही मचाई है, जहां 26 अगस्त को ग्लेशियर फटने के बाद आई बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 1,000 को पार कर गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1,003 से 1,050 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि चीन में भी 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इस भयानक त्रासदी में लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 39 देशों के 583 से 590 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, लापता लोगों में अमेरिका के 64 नागरिक भी शामिल हैं, जिनकी तलाश के लिए राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं।

राहत और बचाव कार्यों में जुटे हजारों जवान

नेपाल सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 21,000 से अधिक जवानों को मैदान में उतारा है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने इस विनाशकारी आपदा के लिए सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में तापमान में 1.8 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण यह गंभीर स्थिति पैदा हुई। सरकार को इस आपदा से निपटने के लिए अब तक 42 मिलियन डॉलर से अधिक की विदेशी सहायता मिल चुकी है। राहत कर्मियों का मुख्य ध्यान 12 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 900 लापता मजदूरों की तलाश पर है, जिनमें से लगभग 500 मजदूरों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

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घायलों का मुफ्त इलाज और अंतरराष्ट्रीय मदद

अब तक कुल 11,800 से 12,000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। सरकार ने आदेश दिया है कि सभी घायलों का मुफ्त इलाज किया जाए और पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद दी जाएगी। राजधानी काठमांडू में पुलिस अज्ञात शवों का डीएनए सैंपल लेकर उनका अंतिम संस्कार कर रही है ताकि बाद में उनकी पहचान की जा सके। इस मुश्किल समय में दुनिया भर के देश नेपाल की मदद के लिए आगे आए हैं। कतर ने 1 सितंबर 2026 को अपने सैन्य विमान से भोजन, पानी के उपकरण और रोशनी का सामान भेजा है जिससे 52,000 लोगों को मदद मिलेगी। चीन ने 300 मिलियन रुपये, एक बचाव दल और 50 टन राहत सामग्री दी है। भारत ने भी 26 अगस्त से अपना 11 सदस्यीय दल और 68.5 टन राहत सामग्री भेजी है, और इसके साथ ही 163 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया है। इसके अलावा अमेरिका ने 500,000 डॉलर, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने 83 टन राहत सामग्री और 10 मिलियन डॉलर, स्विट्जरलैंड ने एक मिलियन स्विस फ़्रैक, और एशियाई विकास बैंक ने 5 मिलियन डॉलर की बजटीय सहायता के साथ 150,000 डॉलर की तकनीकी सहायता देने की घोषणा की है। विश्व बैंक ने भी 167 मिलियन डॉलर का कर्ज देने का वादा किया है। इस पूरी स्थिति की आधिकारिक जानकारी के लिए आप नेपाल विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग पर जा सकते हैं।

महिलाओं की मुश्किलें और बीमारियों का खतरा

संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं OCHA और UN Women ने यह चेतावनी दी है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 43,000 महिलाओं और बच्चियों को तुरंत भोजन, साफ पानी और सुरक्षा की जरूरत है। दूषित पानी और राहत शिविरों में अत्यधिक भीड़भाड़ के कारण स्वास्थ्य अधिकारियों ने डेंगू, स्क्रब टायफस और पानी से फैलने वाली अन्य बीमारियों के बढ़ने की आशंका जताई है। IsraAID, Direct Relief और Save the Children जैसे संगठन भी जमीन पर उतरकर लोगों को मेडिकल सपोर्ट, हाइजीन किट और जरूरी सामान बांट रहे हैं।

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