नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, मरने वालों का आंकड़ा पहुंचा 1204, ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन की उठी मांग.

Praggya Singh sabal2 September 20263 min read28 viewsWorld
नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, मरने वालों का आंकड़ा पहुंचा 1204, ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन की उठी मांग.

नेपाल में आए विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की वजह से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस भयंकर आपदा में मरने वालों की कुल संख्या 1,204 तक पहुंच गई है। यह आपदा नेपाल और चीन सीमा के पास एक ग्लेशियर के टूटने और बर्फ-चट्टान के हिमस्खलन की वजह से आई थी, जिसने 26 अगस्त 2026 को देश को अपनी चपेट में ले लिया था। इस तबाही के कारण भूतेकोशी और त्रिशूल नदी प्रणालियों में पानी और मलबे का सैलाब आ गया था, जिससे चारों तरफ भारी तबाही मच गई थी।

आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों की स्थिति

आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, 2 सितंबर 2026 तक कुल 1,114 शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ नेपाल पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, इस हादसे में कुल 1,127 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके अलावा प्रशासन ने अब तक 6,541 लोगों को सुरक्षित बचाया है, जबकि 4,858 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल सरकार ने इस बारे में अधिक जानकारी ReliefWeb रिपोर्ट के माध्यम से साझा की है।

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प्रभावित इलाकों में चौबीसों घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस काम में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल के साथ-साथ भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर की विशेष अंतरराष्ट्रीय टीमें भी पूरी ताकत से जुटी हुई हैं। ये सभी टीमें लगभग 2.2 मिलियन टन मलबा हटाने का काम कर रही हैं। इसके साथ ही हाइड्रोपॉवर प्लांट की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भी अभियान जारी है, जहां अब शवों को अस्थाई रूप से दफनाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। इन तमाम मुश्किलों के बीच एक अमेरिकी यात्री को मलबे के अंदर से सात दिन बाद जिंदा बाहर निकाला गया। इसके अलावा सौ से ज्यादा नेपाली नागरिकों और एक ब्रिटिश नागरिक को भी सुरक्षित बचाया गया है।

प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह का बयान

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने 2 सितंबर को प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए इस घटना को हिमालयी क्षेत्र में तेजी से बढ़ते जलवायु जोखिमों का एक बड़ा संकेत बताया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की आपदाएं यह बताती हैं कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पूरी दुनिया को मिलकर जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल की भूमिका बहुत कम है, फिर भी देश अंतरराष्ट्रीय जलवायु मुआवजे के लिए लगातार अपनी आवाज उठा रहा है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी यह स्पष्ट किया कि सरकार आने वाले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेपाल की जलवायु से जुड़ी समस्याओं को पूरी मजबूती के साथ उठाएगी।

इस आपदा का असर सिर्फ नेपाल तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी सीमाएं पार होकर चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र तक पहुंच गईं, जहां 21 लोगों की मौत की खबर है और 541 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा भारत के मैदानी इलाकों में भी नदियों के जरिए कुछ शव बहकर पहुंचे हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस (IFRC) और AMDA Nepal जैसे कई मानवीय संगठन लगातार राहत और मेडिकल सहायता प्रदान कर रहे हैं। हालांकि खराब रास्ते और बीच-बीच में हो रही बारिश राहत और बचाव कार्यों में लगातार रुकावट पैदा कर रही है।

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