Nepal Flood Update: नेपाल में बाढ़ से तबाही, मौत का आंकड़ा पहुंचा 682 और हजारों लोग अब भी लापता।

नेपाल के नुवाकोट जिले में भारी तबाही के बाद आम लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आए भयानक फ्लैश फ्लड के बाद लापता लोगों की तलाश में हो रही देरी और सरकारी मदद न मिलने से बचे हुए लोग काफी नाराज हैं। यह प्राकृतिक आपदा बुधवार, 26 अगस्त 2026 को सुबह लगभग 8:40 बजे आई थी। ऐसा माना जा रहा है कि यह हादसा बर्फ और चट्टान के खिसकने यानी एवलांच की वजह से हुआ, जिससे ल्हेंडे खोला नदी का रास्ता बंद हो गया था। शनिवार, 29 अगस्त 2026 तक के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस आपदा में कम से कम 682 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें नेपाल में 675 और तिब्बत में 7 लोगों की जान गई है। इसके अलावा पूरे इलाके में 3,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
राहत और बचाव कार्यों का हाल
नेपाल पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 29 अगस्त को दोपहर 4:00 बजे तक कुल 669 शव बरामद किए जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि अकेले नेपाल में लगभग 2,000 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें वे मजदूर भी शामिल हैं जो त्रिशूली 3ए और 3बी जैसे हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट्स की अंडरग्राउंड सुरंगों में फंसे हुए थे। हालांकि आपातकालीन टीमों ने अब तक 7,514 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है, जिसमें 227 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। लेकिन इसके बावजूद वहां हालात अभी भी बहुत गंभीर बने हुए हैं। नेपाल में सबसे ज्यादा प्रभावित जिले नुवाकोट में कुल 2,301 घायल लोग दर्ज किए गए थे, जिनमें से 1,622 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जिसकी जानकारी आधिकारिक तौर पर दी गई है। इस पूरी स्थिति के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए आप ReliefWeb Report पर जा सकते हैं और नेपाल सरकार के ताजा अपडेट्स के लिए Ministry of Home Affairs Nepal की वेबसाइट देख सकते हैं।
सरकार का कड़ा रुख और वन-डोर पॉलिसी
नेपाल के प्रधानमंत्री Balendra Shah ने लोगों की जान बचाने के काम को सबसे ऊपर रखा है। उन्होंने नेपाल आर्मी और पुलिस को पूरी तरह से मैदान में उतार दिया है। सरकार ने स्थिति को संभालते हुए रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों को अगले तीन महीनों के लिए आपदा संकट क्षेत्र घोषित कर दिया है। राहत सामग्री बांटने में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए सरकार ने सख्त वन-डोर पॉलिसी लागू की है। इसका मतलब है कि सभी तरह की मदद अब केवल तय किए गए सेंटरों जैसे कि बटार स्थित नेपाल आर्मी के मैथाली बैरक के जरिए ही बांटी जाएगी। राहत कार्य में मदद के लिए भारत से 11 सदस्यों की एक टेक्निकल टीम सुरंगों की खुदाई में जुटी हुई है और चीन से भी और मदद मिलने की उम्मीद है। इन तमाम कोशिशों के बावजूद, अल जजीरा के पत्रकार बार्नबी चक के मुताबिक, राहत कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर बचे हुए लोगों में भारी गुस्सा है, क्योंकि प्रशासन ने इलाके में आगे भी बाढ़ आने के खतरे को देखते हुए हाई अलर्ट जारी कर रखा है। नेपाल में इस आपदा और बचाव कार्यों से जुड़ी हर एक ताजा जानकारी के लिए आप ReliefWeb Nepal Updates पर पूरी रिपोर्ट देख सकते हैं।