नेपाल बाढ़ का कहर, मृतकों की संख्या पहुंची 1,344, हजारों लोग अब भी लापता और शुरू हुआ अंतिम संस्कार.

नेपाल में भारी तबाही मचाने वाली बाढ़ और बर्फीले तूफान के बाद हालात अभी भी बहुत गंभीर बने हुए हैं। नेपाल और तिब्बत की सीमा के पास बर्फ की चट्टान खिसकने और हिमस्खलन के कारण आए भयंकर सैलाब में मरने वालों की आधिकारिक संख्या बढ़कर 1,344 हो गई है। इस आपदा में जान गंवाने वाले लोगों में 758 वयस्क, 85 बच्चे और 501 ऐसे शव शामिल हैं जिनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं लेकिन अभी भी हजारों लोगों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है जिससे पूरे देश में शोक और चिंता का माहौल है।
लापता लोगों की तलाश और राहत अभियान
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक नेपाल में लगभग 4,887 से 5,053 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 2,930 नेपाली नागरिक और 606 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे खोज अभियान को आज ग्यारहवां दिन पूरा हो गया है। बचाव दल का मुख्य ध्यान उन एक दर्जन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर है जहां सैकड़ों कामगार फंसे हुए हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान बचाव टीमों ने चार जीवित लोगों को ढूंढने में सफलता हासिल की है। इनमें अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से एक चीनी नागरिक और नुवाकोट से एक 64 वर्षीय नेपाली महिला शामिल है। राहत कार्यों में भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया और अमेरिका जैसे देशों की अंतर्राष्ट्रीय टीमें भी मदद कर रही हैं। ये सभी दल राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRRMA के निर्देशों के तहत मिलकर काम कर रहे हैं।
शवों की पहचान और सांकेतिक अंतिम संस्कार
हालात इतने मुश्किल हैं कि कई जगहों से शवों को निकालना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में पीड़ित परिवारों ने हिन्दू शास्त्रों की अनुमति के अनुसार पवित्र कुशा घास से बने पुतलों का उपयोग करके सांकेतिक अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है। पहचान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए नेपाल पुलिस ने भविष्य में डीएनए मिलान के वास्ते 1,030 शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाने से पहले उनके डीएनए सैंपल सुरक्षित रख लिए हैं। अब तक कुल 1,260 मृतकों और 1,012 रिश्तेदारों के डीएनए नमूने सफलतापूर्वक एकत्र किए जा चुके हैं। इस भयंकर आपदा की पूरी जानकारी नेपाल विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई स्थिति अपडेट में साझा की गई है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
इस बड़ी आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बेघर हुए नागरिकों को सुरक्षित आवास मुहैया कराने का वादा किया है। इसके अलावा भूमि प्रबंधन, सहकारी और गरीबी निवारण मंत्रालय ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाली बस्तियों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने के लिए नया कानून भी पेश किया है ताकि भविष्य में इस तरह के बड़े नुकसान से बचा जा सके। सरकार लगातार प्रभावित परिवारों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है और देश में राहत सामग्री बांटी जा रही है।