नेपाल बाढ़ के 18 दिन बाद भी हजारो लोग लापता, डीएनए जांच से हो रही पहचान.

Aanya14 September 20265 min read28 viewsWorld
नेपाल बाढ़ के 18 दिन बाद भी हजारो लोग लापता, डीएनए जांच से हो रही पहचान.

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के 18 दिन बीत जाने के बाद भी हालात पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाए हैं और हजारों लोग अब भी लापता हैं। जिन परिवारों ने अपने अपनों को इस आपदा में खोया है, वे लगातार उनकी तलाश कर रहे हैं लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी न तो उनके जिंदा होने की कोई खबर मिल पा रही है और न ही उनके शवों का कोई सुराग हाथ लग रहा है। बाढ़ के दौरान बरामद किए गए ज्यादातर शवों की हालत इतनी ज्यादा खराब हो चुकी है कि उन्हें देखकर पहचान पाना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं बचा है। ऐसे हालात में अब उन तमाम परिवारों के लिए डीएनए जांच ही एकमात्र आखिरी उम्मीद बची है जो अपने परिजनों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

सोमवार सुबह तक बरामद हुए इतने शव

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सोमवार सुबह 10 बजे तक बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित इलाकों से कुल 1,388 शवों को बाहर निकाला जा चुका था। इनमें से बेहद कम यानी केवल 103 शवों की ही पहचान हो पाई है जिन्हें प्रशासन ने औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके परिजनों को सौंप दिया है। इसके विपरीत, जिन 1,285 शवों की पहचान किसी भी तरह से नहीं हो सकी, उन्हें फिलहाल स्थानीय नियमों के अनुसार जमीन में दफना दिया गया है। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अविनारायण काफ्ले के अनुसार प्रशासन ने आम जनता की मदद के लिए पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर कुल 1,334 शवों की तस्वीरें अपलोड की हैं ताकि लोग अपनों की शिनाख्त कर सकें। इससे पहले भी कुछ परिवारों ने वेबसाइट पर इन तस्वीरों को देखकर अपने परिजनों के शवों की पहचान करने में सफलता हासिल की थी।

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लापता लोगों के लिए डीएनए जांच ही सहारा

बाढ़ के थमने के बाद भी लगभग 5 हजार से अधिक लोगों के अब भी लापता होने की लगातार खबरें सामने आ रही हैं। जिन घरों के चिराग बुझ गए हैं और जिन्हें अपनों का कोई अता-पता नहीं मिल रहा, वे लगातार डीएनए रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अब तक कुल 1,779 परिजनों के रक्त के नमूने यानी ब्लड सैंपल लिए जा चुके हैं और यह आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि जिन अज्ञात शवों को अभी दफनाया गया है, भविष्य में डीएनए रिपोर्ट मैच होने पर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा और संबंधित परिवार को सम्मान के साथ सौंप दिया जाएगा। लंबे समय तक इंतजार करने के बाद कुछ परिवारों ने तो अपनों के जीवित मिलने की सारी उम्मीदें छोड़ दी हैं और कुश का शव बनाकर उनका पारंपरिक तरीके से अंतिम संस्कार भी कर दिया है। हालांकि, अभी भी कई ऐसे पीड़ित परिवार मौजूद हैं जो डीएनए जांच की पूरी रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपने परिजन का शव पाकर अपने हाथों से अंतिम संस्कार कर सकें।

प्रयोगशालाओं में चल रही है जांच की प्रक्रिया

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अविनारायण काफ्ले ने मीडिया को जानकारी दी है कि अभी तक लगभग 400 शवों की डीएनए रिपोर्ट पूरी तरह से तैयार की जा चुकी है। शवों से जरूरी नमूने लेकर उन्हें राजधानी काठमांडू के सामाखुशी स्थित नेपाल पुलिस की विधि विज्ञान प्रयोगशाला, राष्ट्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला और नेपाल विज्ञान तथा प्रविधि प्रज्ञा-प्रतिष्ठान (एनएएसटी) की प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है जहां वैज्ञानिक बेहद बारीकी से डीएनए टेस्ट कर रहे हैं। राष्ट्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला के प्रमुख और जाने-माने डीएनए विशेषज्ञ निराजन थापा के मुताबिक, मौजूदा संसाधनों और काम करने की क्षमता को देखते हुए सभी बचे हुए शवों की डीएनए जांच का यह पूरा काम पूरा होने में लगभग ढाई महीने तक का लंबा समय लग सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी करीब 1,200 से 1,300 शवों की डीएनए जांच किया जाना बाकी है। वर्तमान में एनएएसटी और राष्ट्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला मिलकर हर हफ्ते लगभग 250 शवों और 400 परिजनों के रक्त नमूनों की जांच का काम तेजी से कर रही हैं। हालांकि, कई बार कुछ शवों के डीएनए परिणाम पूरी तरह स्पष्ट नहीं आ पाते हैं जिसके कारण वैज्ञानिकों को दोबारा से एक अलग प्रक्रिया के तहत जांच करनी पड़ती है। विशेषज्ञ निराजन थापा का यह भी कहना है कि इस पूरी जांच में लगने वाला समय इस बात पर भी पूरी तरह निर्भर करेगा कि आने वाले दिनों में प्रशासन की तरफ से कितने नए उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं और वे कितनी तेजी और सटीकता के साथ काम करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और उपकरणों की स्थिति

नेपाल के भीतर डीएनए जांच के लिए जरूरी आधुनिक उपकरणों की सीमित संख्या होने के कारण इस संकट की घड़ी में कई अन्य देशों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। दक्षिण कोरिया सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए चार डीएनए उपकरण अब नेपाल पुलिस की प्रयोगशाला में सुचारू रूप से काम करना शुरू कर चुके हैं, जिससे जांच की रफ्तार में कुछ सुधार आया है। हालांकि, अन्य कई उपकरणों को अभी भी प्रयोगशाला में स्थापित किया जाना बाकी है जिसका काम चल रहा है। इससे पहले चीन ने भी मदद के तौर पर तीन अत्याधुनिक उपकरण नेपाल की राष्ट्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला को दिए थे, लेकिन तकनीकी कारणों से उन उपकरणों का इस्तेमाल शवों की डीएनए जांच के लिए नहीं किया जा सका। उनके काम न करने के बाद चीनी विशेषज्ञों की एक टीम ने नए उपकरण मंगवाने की बात कही थी, लेकिन वे नए उपकरण अब तक नेपाल की सीमा के भीतर नहीं पहुंच पाए हैं। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि बाढ़ के दौरान मिले सैकड़ों शवों की पहचान करना और हजारों लापता लोगों के बेहाल परिवारों को उनके सवालों का जवाब देना अब पूरी तरह से देश में मौजूद डीएनए जांच की क्षमता और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता पर ही आकर टिक गया है।

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