Nepal Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बड़ा ग्लेशियर टूटने से 165 लोगों की मौत, 1500 से अधिक लोग लापता

नेपाल और तिब्बत सीमा के पास एक बड़े ग्लेशियर के टूटने की वजह से भीषण बाढ़ आ गई है, जिससे चारों तरफ तबाही मच गई है। इस खतरनाक हादसे में नेपाल में कम से कम 165 लोगों की मौत हो गई है और चीन में 3 लोगों की जान चली गई है। शुरुआत में लोगों को लगा कि यह कोई भूकंप है, लेकिन बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी US Geological Survey ने पुष्टि की कि यह 5.2 तीव्रता का ग्लेशियर टूटने का मामला था जिसके कारण भारी मात्रा में मलबा और पानी नीचे आ गया।
त्रिशूली नदी में अचानक बढ़ा पानी और भारी नुकसान
इस हादसे के बाद त्रिशूली नदी का जलस्तर महज 30 मिनट के भीतर 27 फीट तक बढ़ गया, जिससे रास्ते में आने वाले घर, पुल और तमाम बुनियादी ढांचा पूरी तरह तबाह हो गए। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के मुताबिक, नेपाल में लगभग 826 लोग लापता हैं, जबकि पूरे इलाके में लापता होने वालों की कुल संख्या लगभग 1,500 तक पहुंच गई है। नेपाल में लापता होने वालों में करीब 579 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें 177 से 178 भारतीय, 63 से 65 अमेरिकी, 34 से 35 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश, 25 कनाडाई और लगभग 100 चीनी नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा नेपाल के पर्यटन बोर्ड ने बताया कि तिब्बत में भी 260 से ज्यादा विदेशी नागरिक लापता हैं।
प्रधानमंत्री का दौरा और राहत एवं बचाव कार्य
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने सबसे ज्यादा प्रभावित नुवाकोट जिले का दौरा किया और प्रभावित इलाकों को अगले तीन महीने के लिए आपदा ग्रस्त घोषित कर दिया है। सरकार ने बचाव और राहत कार्यों की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली है। नेपाल सेना और पुलिस के 5,000 से अधिक जवान और हेलिकॉप्टर लगातार खोज अभियान में जुटे हुए हैं। सरकारी प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने पुष्टि की कि नेपाल ने भारत और चीन दोनों से मदद की गुहार लगाई है। भारत ने पहले ही दो उड़ानें भेजकर 37.5 टन राहत सामग्री पहुंचाई है, जबकि अमेरिका ने 500,000 डॉलर की आपातकालीन मानवीय सहायता देने का ऐलान किया है। इस बारे में अधिक जानकारी US Embassy Kathmandu की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है।
बुनियादी ढांचे को भारी क्षति और यातायात पर रोक
इस आपदा की वजह से देश में बुनियादी ढांचे को बहुत नुकसान हुआ है। कुल 19 पुल और 40 किलोमीटर लंबी सड़कें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिससे लगभग 15 अरब रुपये का नुकसान हुआ है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने जानकारी दी कि छह बड़े जलविद्युत और ट्रांसमिशन केंद्र बंद हो गए हैं, जिससे बिजली सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। अधिकारियों ने पृथ्वी राजमार्ग और मुग्लिंग-नारायणगढ़ रोड जैसे मुख्य मार्गों पर यात्रा करने पर रोक लगा दी है। सरकार विस्थापित हुए लोगों के लिए मुफ्त मेडिकल इलाज, खाना और रहने की व्यवस्था करने की योजना बना रही है और नागरिकों से सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गई है।