नेपाल में बाढ़ का कहर, बुनियादी ढांचे को हुआ 1.72 लाख करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान.

Nura Basta14 September 20264 min read57 viewsWorld
नेपाल में बाढ़ का कहर, बुनियादी ढांचे को हुआ 1.72 लाख करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान.

पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। सरकार की तरफ से बनाई गई एक विशेष टीम ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में बताया है कि इस प्राकृतिक आपदा की वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी नुकसान हुआ है। रिपोर्ट का नाम ‘रसुवा-भोटेकोशी बाढ़ 2083: त्वरित क्षति एवं आवश्यकता आकलन’ रखा गया है, जिसमें बाढ़ से हुए नुकसान का पूरा लेखा-जोखा आम जनता के सामने रखा गया है। इस आपदा के कारण देश की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा है और सरकारी तथा निजी संपत्ति को भारी क्षति पहुंची है। बाढ़ की वजह से देश के कई इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और लोगों को अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकार अब इस स्थिति से निपटने और देश को फिर से पटरी पर लाने के लिए लगातार काम कर रही है। बाढ़ के पानी ने सब कुछ अपने साथ बहा लिया, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए हैं।

ऊर्जा और बिजली क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान

इस आपदा में सबसे अधिक मार ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ी है, जहां जलविद्युत परियोजनाओं और बिजली की ट्रांसमिशन लाइनों को भारी क्षति पहुंची है। रिपोर्ट के अनुसार, अकेले ऊर्जा क्षेत्र को 134.69 अरब रुपये का नुकसान हुआ है, और इस क्षेत्र को ठीक करने के लिए लगभग 390 अरब रुपये की भारी भरकम राशि की जरूरत होगी। इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को करीब 56 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। सड़कों और यातायात के साधनों की बात करें तो सड़कों को लगभग 22 अरब रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि इन्हें दोबारा बनाने के लिए 55.18 अरब रुपये से अधिक खर्च करने पड़ेंगे। इसी तरह देश के कई महत्वपूर्ण पुल टूट गए हैं, जिससे आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। पुलों को 11.35 अरब रुपये का नुकसान हुआ है और इन्हें फिर से खड़ा करने में करीब 18.06 अरब रुपये का खर्च आने का अनुमान लगाया गया है। सरकार ने इन सभी आंकड़ों को विस्तार से दर्ज किया है ताकि सही समय पर सही कदम उठाए जा सकें और यातायात को जल्द से जल्द सुचारू किया जा सके।

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संचार, पानी और अन्य बुनियादी सेवाओं का हाल

बाढ़ के पानी ने केवल सड़कों और बिजली को ही नहीं बल्कि संचार माध्यमों और पानी की सप्लाई को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। दूरसंचार क्षेत्र को लगभग 62 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और इसे ठीक करने के लिए करीब 1 अरब रुपये की आवश्यकता बताई गई है। इसके अलावा आम लोगों तक साफ पानी पहुंचाने वाली जलापूर्ति प्रणालियों और स्वच्छता से जुड़े बुनियादी ढांचे को 1.38 अरब रुपये का नुकसान हुआ है। खेतों तक पानी पहुंचाने वाली सिंचाई संरचनाओं को भी 1.64 अरब रुपये की क्षति उठानी पड़ी है। बाढ़ के सैलाब ने लोगों के घरों, सरकारी इमारतों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और सांस्कृतिक धरोहरों को भी नहीं छोड़ा। इन सभी जगहों को मिलाकर कुल 67.84 अरब रुपये का नुकसान हुआ है और इन सभी सुविधाओं को दोबारा ठीक करने के लिए लगभग 100 अरब रुपये की जरूरत का अनुमान लगाया गया है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक हर तरफ बर्बादी के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं और लोग सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

कुल भौतिक नुकसान और पुनर्निर्माण का खर्च

सरकारी आकलन के मुताबिक, इस भीषण बाढ़ से देश को कुल भौतिक नुकसान 274.48 अरब नेपाली रुपये का हुआ है। इन सभी टूटी-फूटी संरचनाओं और इमारतों के पुनर्निर्माण के लिए कुल मिलाकर करीब 723.31 अरब रुपये की भारी राशि की जरूरत पड़ेगी। रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि कुल पुनर्निर्माण राशि में से लगभग 9 अरब रुपये पहले छह महीनों के भीतर बांटे जाएंगे, ताकि तुरंत राहत और पुनर्प्राप्ति का काम शुरू किया जा सके। बाकी बची हुई बड़ी रकम का इस्तेमाल देश में दीर्घकालीन पुनर्वास और पक्के निर्माण कार्यों के लिए किया जाएगा। सरकार इस आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है और प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने का काम तेजी से कर रही है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं, जहाँ इस आपदा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर विस्तार से दी गई है।

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