नेपाल में बाढ़ के बाद तबाही, पुनर्निर्माण और राहत कार्यों के लिए चाहिए 7.23 लाख करोड़ रुपये.

Aanya11 September 20264 min read24 viewsWorld
नेपाल में बाढ़ के बाद तबाही, पुनर्निर्माण और राहत कार्यों के लिए चाहिए 7.23 लाख करोड़ रुपये.

नेपाल में पिछले माह अगस्त के महीने में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण भारी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए अब भारी भरकम रकम की जरूरत है। सरकार की तरफ से सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पुनर्निर्माण और पुनर्स्थापना के कामों को पूरा करने के लिए कुल 7.23 लाख करोड़ नेपाली रुपये यानी करीब 7 खरब 23 अरब 31 करोड़ 52 लाख रुपये की जरूरत का अनुमान लगाया गया है। यह प्रारंभिक आकलन राष्ट्रीय योजना आयोग और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण समेत कई अन्य सरकारी विभागों की संयुक्त तकनीकी टीम ने मिलकर तैयार किया है, ताकि नुकसान का सही अंदाजा लगाया जा सके।

भोटेकोशी नदी की बाढ़ से मचा था हाहाकार

बीते 26 अगस्त को तिब्बत से बहने वाली भोटेकोशी नदी में अचानक भयंकर बाढ़ आ गई थी, जिसने नेपाल के कई इलाकों में भयंकर तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के पानी और मलबे ने लोगों के घर, खेत, व्यापारिक प्रतिष्ठान, सड़कें, पुल, ड्राई पोर्ट, मालवाहक कंटेनर और सीमा नाकों पर खड़े वाहनों को पूरी तरह से तबाह कर दिया। इस आपदा की वजह से अब तक कुल 1,377 लोगों की जान जा चुकी है, जिससे पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है। सरकार की रैपिड डैमेज एंड नीड्स असेसमेंट रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा नुकसान बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में हुआ है, जिसके पुनरुद्धार के लिए अकेले 4 खरब 3 अरब 57 करोड़ 19 लाख रुपये खर्च करने होंगे। यह कुल जरूरत का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा बनता है।

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ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र को सबसे बड़ा झटका

बाढ़ के तेज बहाव ने देश के ऊर्जा और सड़क तंत्र को बहुत बुरी तरह से तोड़कर रख दिया है। आपदा की चपेट में आने से 759 मेगावाट क्षमता वाली कुल 13 जलविद्युत परियोजनाएं और 24 मेगावाट क्षमता के 5 सौर संयंत्र पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। सिर्फ ऊर्जा और ग्रिड प्रणाली को दोबारा ठीक करने के लिए लगभग 3 खरब 90 अरब 62 करोड़ 30 लाख 40 हजार रुपये की आवश्यकता है। इसके अलावा सड़क मार्ग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिसमें 69 किलोमीटर सड़कें और 33 मोटरेबल पुल पूरी तरह बह गए हैं, जबकि चार पुलों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों के 64 झूला पुलों में से 53 पुल टूट चुके हैं। इन सभी परिवहन साधनों को ठीक करने के लिए सरकार को 73 अरब 34 करोड़ 29 लाख 60 हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

हजारों घर और सरकारी इमारतें हुईं क्षतिग्रस्त

इस आपदा ने आम लोगों के जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जिलों में कुल 7,570 निजी घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सिर्फ नुवाकोट की विदुर नगरपालिका क्षेत्र में ही 3,026 घर तबाह हुए हैं। घरों के अलावा 48 सरकारी भवन, 18 स्कूल, 7 स्वास्थ्य संस्थान और 30 सांस्कृतिक विरासत स्थल भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इन सामाजिक और आवासीय क्षेत्रों को दोबारा खड़ा करने के लिए 1 खरब 3 अरब 54 करोड़ 99 लाख रुपये की जरूरत होगी। वहीं कृषि, व्यापार और बैंकिंग जैसे उत्पादक क्षेत्रों को भी भारी आर्थिक चोट पहुंची है, क्योंकि बाढ़ की वजह से 1,806 हेक्टेयर कृषि फसल, 17 बैंक शाखाएं और 4,800 व्यावसायिक प्रतिष्ठान बर्बाद हो गए हैं। उत्पादक क्षेत्र के पुनरुद्धार के लिए 50 अरब 77 करोड़ 49 लाख रुपये का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा नदी प्रबंधन और जोखिम कम करने के लिए 94 अरब 75 करोड़ 31 लाख रुपये तथा कीचड़ और मलबा हटाने के लिए 51 करोड़ 54 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।

दो चरणों में होगा पूरा काम

सरकार ने इस भारी-भरकम पुनर्निर्माण कार्य को दो अलग-अलग चरणों में बांटने का फैसला किया है। पहले चरण के तहत अगले छह महीनों में तत्काल राहत और छोटे स्तर पर अल्पकालीन पुनर्निर्माण कार्यों के लिए 8 अरब 73 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च किए जाने की योजना है। वहीं दूसरे और मुख्य चरण में दीर्घकालीन पुनर्निर्माण के लिए भारी-भरकम राशि यानी 7 खरब 14 अरब 58 करोड़ 2 लाख रुपये की आवश्यकता होगी। राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण के वरिष्ठ डिविजनल इंजीनियर सुशील कुमार श्रेष्ठ ने बताया कि सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों से पूरा डेटा जुटाकर और उसका बारीकी से विश्लेषण करने के बाद ही यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके अलावा, राष्ट्रीय योजना आयोग के प्रवक्ता हरिशरण पुडासैनी ने जानकारी दी है कि सरकार ने पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट यानी पीडीएनए की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट अगले तीन महीनों में पूरी तरह तैयार होकर सामने आ जाएगी।

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