नेपाल बाढ़: राहत और पुनर्वास के नए चरण की शुरुआत, प्रभावितों को मिलेगी बड़ी मदद

Gautam Sahu1 October 20262 min read0 viewsWorld
नेपाल बाढ़: राहत और पुनर्वास के नए चरण की शुरुआत, प्रभावितों को मिलेगी बड़ी मदद

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के एक महीने बाद अब सरकार ने अपनी रणनीति बदल दी है। खोज और बचाव अभियान के बाद अब सरकार ने राहत और पुनर्वास के नए चरण में प्रवेश करने का बड़ा निर्णय लिया है। गृहमंत्री सुधन गुरुंग की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन कार्यकारी समिति की 37वीं बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया।

बचाव अभियान का समापन और नए कानून की तैयारी

नेपाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि अब खोज और बचाव का मुख्य चरण पूरा हो चुका है। सुरक्षा बलों और जिला समितियों की रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया गया है कि अब ध्यान लापता लोगों के कानूनी समाधान और विस्थापितों के पुनर्वास पर केंद्रित किया जाएगा।

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मुख्य निर्णय इस प्रकार हैं:

  • लापता लोगों को मृत घोषित करने के लिए कानून में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।
  • लापता व्यक्तियों के परिवारों को उचित राहत प्रदान की जाएगी।
  • विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी आवास और पुनर्वास की प्रक्रिया तेज की जाएगी।

किराए के मकान के लिए मिलेगी आर्थिक सहायता

सरकार ने उन परिवारों के लिए एक विशेष योजना शुरू करने का निर्णय लिया है जो अस्थायी सरकारी आवास में रहने के बजाय निजी तौर पर किराए के मकान में रहना पसंद करते हैं। ऐसे परिवारों को सरकार की ओर से हर महीने 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना को लागू करने की प्रक्रिया अब शुरू हो चुकी है।

पुनर्वास के लिए जमीन और आवास की व्यवस्था

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यकारी प्रमुख डॉ. धर्मराज उप्रेती के अनुसार, पुनर्वास के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान कर ली गई है। भूमि व्यवस्था मंत्रालय द्वारा गठित समिति ने जमीनें चिन्हित कर दी हैं।

आवास निर्माण की योजना:

भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मंत्रालय अस्थायी आवास बनाने का काम संभालेगा। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले स्थानीय निकायों और संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। वर्तमान में, कई परिवार जैसे रसुवा के गोसाइँकुंड और उत्तरगया के विस्थापित लोग होल्डिंग सेंटरों में रह रहे हैं, जिनके लिए आगे के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

हालांकि कुछ जलविद्युत परियोजनाओं के टनल और मलबे वाले क्षेत्रों में अभी भी कुछ खोज कार्य शेष हैं, लेकिन सरकार का मानना है कि अब मुख्य बचाव अभियान को पुनर्वास की दिशा में मोड़ना आवश्यक है।

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