नेपाल में बाढ़ से बेघर हुए तमांग समुदाय के लोग अब अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं

नुवाकोट (नेपाल): नेपाल के रसुवा जिले में अगस्त महीने में आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे ने कई लोगों की जिंदगी उजाड़ दी है। इस आपदा में अपना सब कुछ खोने के बाद अब पीड़ित लोग नुवाकोट के बड़ा चौतारा अस्थायी शिविर में शरण लिए हुए हैं, जहां वे फिर से अपनी जिंदगी शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं।
नंगसी तमांग और उनके पति सिंहबीर तमांग उन लोगों में शामिल हैं जिनका घर 26 अगस्त को बर्फ, पानी और मलबे की चपेट में आ गया था। नंगसी ने बताया कि जब रिश्तेदारों के फोन से बाढ़ की चेतावनी मिली, तो वे केवल पहने हुए कपड़ों के साथ ऊंचे स्थानों की ओर भागे। उनके पास पहनने के लिए चप्पल तक नहीं बची और दो दिनों तक उन्हें खाने को कुछ नहीं मिला।
इस बुजुर्ग जोड़े के लिए यह पिछले एक दशक में दूसरी बार विस्थापन है। इससे पहले 2015 के विनाशकारी भूकंप ने रसुवा जिले के कई गांवों को तबाह कर दिया था, जिसके बाद तमांग समुदाय के करीब 250 परिवार खल्ते के नदी तट पर बस गए थे। सरकार ने इसे अस्थायी विस्थापन बताया था, लेकिन समय के साथ यह उनका स्थायी ठिकाना बन गया, जिसे अगस्त की आपदा ने फिर से नष्ट कर दिया।
सिंहबीर तमांग के मुताबिक, रसुवा से निकलने के बाद वे नीलकंठ नगरपालिका और लाडेय जैसे कई इलाकों से होते हुए पहाड़ियों को पार कर अंततः यहाँ पहुंचे। बिदुर-04 के स्थानीय निकाय ने उनके लिए शुरुआती इंतजाम किए, जिसके बाद उन्हें सरकारी जमीन पर बने बड़ा चौतारा शिविर में शिफ्ट किया गया।
इस आपदा में कई लोगों ने अपने परिजनों को खोया है। तमांग दंपत्ति के कुछ रिश्तेदार अभी भी लापता हैं, जबकि अन्य निवासियों ने अपने 32 करीबियों को खोया है। पीड़ित अब भी इस सदमे से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल के प्रमुख स्वदेशी समुदायों में से एक तमांग समुदाय लंबे समय से हाशिए पर रहा है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2015 के भूकंप के पीड़ितों में करीब 34 प्रतिशत लोग तमांग समुदाय से थे। यह समुदाय देश की कुल आबादी का लगभग 6 प्रतिशत है, जिसे बार-बार विस्थापन का सामना करना पड़ा है।
बड़ा चौतारा शिविर में फिलहाल 511 लोग रह रहे हैं, जिनमें 139 महिलाएं, 160 पुरुष, 115 लड़के और 97 लड़कियां शामिल हैं। शिविर में रह रहे लोग इस बात को लेकर डरे हुए हैं कि उन्हें एक बार फिर किसी दूसरी जगह जाना पड़ सकता है।