नेपाल में जलप्रलय का तांडव, मिले 724 शव, पहचान न होने पर एयरटाइट बैग में दफनाने का बड़ा फैसला.

Aanya30 August 20264 min read12 viewsWorld
नेपाल में जलप्रलय का तांडव, मिले 724 शव, पहचान न होने पर एयरटाइट बैग में दफनाने का बड़ा फैसला.

नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय ने भारी तबाही मचाई है, जहां नदियों के उफान में बहने के बाद अब तक कुल 724 शव बरामद किए जा चुके हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बाद से देश में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं और प्रशासनिक स्तर पर शवों के प्रबंधन को लेकर बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। स्थिति यह है कि इतने बड़े पैमाने पर मिले शवों में से अभी तक मात्र 22 लोगों की ही पहचान हो पाई है, जिससे प्रशासन की चिंता और अधिक बढ़ गई है। अस्पतालों में मृतकों के शवों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जगह और व्यवस्था नहीं बची है, जिसके चलते नेपाल सरकार ने एक सख्त कदम उठाते हुए शवों को विशेष ‘एयरटाइट बैग’ में बंद करके जमीन के नीचे दफनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए पाठक हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट देख सकते हैं।

शवों की पहचान के लिए पुलिस का अनूठा कदम और डीएनए परीक्षण

भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास के इलाकों से बरामद किए गए शव बुरी तरह से क्षत-विक्षत हो चुके हैं, जिनकी सामान्य तरीके से पहचान करना नामुमकिन साबित हो रहा है। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अविनारायण काफ्ले ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जिन 22 शवों की पहचान हो चुकी है, उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। बाकी अज्ञात शवों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस विभाग ने एक विशेष पोर्टल तैयार किया है, जिस पर शवों की तस्वीरें सार्वजनिक की गई हैं। हालांकि तस्वीरें देखने के बाद भी जब अपनों की शिनाख्त नहीं हो पा रही है, तब सरकार ने हर एक शव का डीएनए परीक्षण कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत दफनाने से पहले प्रत्येक शव का डीएनए नमूना सुरक्षित रख लिया जा रहा है ताकि भविष्य में कभी भी परिजनों के मिलने पर मिलान किया जा सके।

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जमीन के नीचे दफनाने की वैज्ञानिक और सुरक्षित प्रक्रिया

प्रशासन की ओर से उठाये गए इस कदम को लेकर भले ही आम लोगों के मन में कुछ सवाल उठ रहे हों, लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली एक बेहद सुरक्षित और मानक विधि है। देवघाट के पास जंगल के एक बड़े हिस्से को इसके लिए तैयार किया गया है, जहां पूरी गरिमा और सम्मान के साथ शवों को जमीन के नीचे दफनाया जा रहा है। प्रत्येक अज्ञात शव को एक अलग संकेत या कोड नंबर दिया जा रहा है। इस कोड नंबर को जमीन के नीचे और ऊपर दोनों जगह दर्ज किया जाता है। इसके अलावा, शव दफनाने वाली जगह की सही जीपीएस लोकेशन, स्पष्ट तस्वीरें, नक्शा और अन्य सभी जरूरी विवरण पूरी सावधानी के साथ रिकॉर्ड में रखे जा रहे हैं ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर परिवार को उनका अपना जन मिल सके।

नवलपरासी और अन्य जिलों में भी शुरू हुई खास तैयारियां

राजधानी काठमांडू के अलावा अन्य प्रभावित जिलों जैसे नवलपरासी पूर्व और नवलपरासी पश्चिम में भी आपदा का असर साफ देखा जा सकता है। नवलपरासी पूर्व के पुलिस अधीक्षक युवराज खड्का ने बताया कि वहां भी अज्ञात शवों को जंगल क्षेत्र में दफनाने के लिए दो अलग-अलग जगहों की पहचान कर ली गई है और डीएनए सैंपल लेने का काम तेजी से चल रहा है। नवलपरासी क्षेत्र में शनिवार शाम तक कुल 223 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें से नवलपरासी पश्चिम के इलाके में 54 पूरे शव और शरीर के 25 अंग मिले हैं, जबकि नवलपरासी पूर्व में 169 शव मिल चुके हैं। इनमें से चार की पहचान होने के बाद तीन शवों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है और एक को सौंपने की प्रक्रिया जारी है। बाकी बचे शवों को पोखरा, रूपन्देही, कपिलवस्तु और स्थानीय अस्पतालों में सुरक्षित रखा गया है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार

शवों के सड़ने और जल्दी खराब होने के खतरे को देखते हुए नेपाल सरकार ने अब बाहरी देशों से मदद मांगनी शुरू कर दी है। देश के विदेशमंत्री शिशिर खनाल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपनी बात रखते हुए अनुरोध किया है कि नेपाल को जल्द से जल्द मोबाइल फ्रीजर, रेफ्रिजरेटेड ट्रक और आधुनिक फोरेंसिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। सरकार का प्रयास है कि पड़ोसी देशों और विभिन्न कूटनीतिक मिशनों के जरिए रेफ्रिजरेटेड ट्रकों की पर्याप्त व्यवस्था कर ली जाए ताकि मृतकों के अवशेषों को सुरक्षित रखा जा सके और फोरेंसिक जांच में तेजी लाई जा सके।

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