नेपाल में बाढ़ का कहर, प्रधानमंत्री शाह ने बताया 781 लोगों की हुई मौत और राहत कार्य जारी.

Aanya31 August 20264 min read20 viewsWorld
नेपाल में बाढ़ का कहर, प्रधानमंत्री शाह ने बताया 781 लोगों की हुई मौत और राहत कार्य जारी.

नेपाल देश में पिछले पांच दिनों से लगातार जारी भयंकर प्राकृतिक आपदा और बाढ़ की वजह से हालात बहुत ज्यादा खराब हो गए हैं। इस भीषण आपदा के बीच देश के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने सामने आकर स्थिति की पूरी जानकारी देशवासियों के साथ साझा की है। सरकार की तरफ से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस भयंकर बाढ़ की चपेट में आने से अब तक कुल 781 लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि इन मुश्किल हालात के बावजूद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों की जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात जुटी हुई हैं और अब तक कुल 9,435 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।

कठिन हालात और राहत बचाव कार्य

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में जो विनाशकारी बाढ़ आई है, उससे जान और माल का बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। मौसम खराब होने की वजह से और वहां का रास्ता बहुत ज्यादा पथरीला और कठिन होने के बावजूद सरकार युद्ध स्तर पर काम कर रही है। लोगों को बचाने के लिए अब तक कुल 394 उड़ानें भरी जा चुकी हैं, जिनमें अकेले रविवार के दिन ही 72 उड़ानें शामिल थीं। प्रभावित इलाकों में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कुल 20,618 जवान पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात किए गए हैं, जो हर संभव मदद पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

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विदेशी टीमों और सेना का सहयोग

जलविद्युत परियोजनाओं के इलाकों से नेपाली सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से 279 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इसके अलावा भारत से आई विशेषज्ञ टीम की मदद से रसुवा में अपर त्रिशूली-1 परियोजना के पास पिछले दो दिनों के भीतर 250 लोगों का सफल उद्धार किया गया है। भारत के अलावा चीन और कोरिया से आए विशेषज्ञ दल भी नेपाली सेना के साथ मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर बचाव अभियान चला रहे हैं। भारतीय टीम सुरंग के अंदर लगभग तीन किलोमीटर तक अंदर जाकर लोगों की खोजबीन कर रही है। नुवाकोट की अपर त्रिशूली-3 ए परियोजना की सुरंग के अंदर भी बचाव अभियान बहुत तेजी से चल रहा है, जहां सेना के इंजीनियर ब्लास्टिंग करके रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

घायलों का इलाज और आर्थिक मदद

बाढ़ के पानी और मलबे की वजह से घायल हुए कुल 267 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर स्थानीय अस्पतालों और राजधानी काठमांडू के बड़े अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। इनमें से 156 लोग पूरी तरह ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं और बाकी का इलाज अभी भी जारी है। प्रभावित इलाकों में लोगों की सेहत का ध्यान रखने के लिए काठमांडू से डॉक्टरों की विशेष टीमें भेजी गई हैं। प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप कोष और प्रधानमंत्री राहत कोष में लोग खुलकर मदद कर रहे हैं। रविवार की दोपहर तक देश के नौ वाणिज्यिक बैंकों के खातों में कुल 5 अरब 24 करोड़ 79 लाख 44 हजार 585 नेपाली रुपये जमा हो चुके हैं। इसके साथ ही हिमालयन और लक्ष्मी बैंक के खातों में कुल 21 लाख 232 अमेरिकी डॉलर भी जमा किए जा चुके हैं।

विभिन्न देशों से मिल रही मानवीय सहायता

रसुवा और नुवाकोट में कुल 26 अस्थायी आश्रय और राहत सामग्री बांटने के केंद्र बनाए गए हैं, जहां से रविवार के दिन ही 3,454 लोगों को रहने के लिए जगह और जरूरी सामान दिया गया। भारत और चीन समेत दुनिया के कई दूसरे देशों से भी लगातार राहत सामग्री भेजी जा रही है। भारत सरकार की तरफ से अब तक चार अलग-अलग चरणों में कुल 68.5 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां नेपाल पहुंचाई जा चुकी हैं। इसके अलावा भारत ने 230 फीट लंबा सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज भी भेजा है और साथ ही सात और बेली ब्रिज देने की बात कही है, जबकि नेपाल की तरफ से ऐसे 30 बेली ब्रिज की मांग की गई है। एशियाई विकास बैंक ने 50 लाख डॉलर की मदद और 1.5 लाख डॉलर की तकनीकी सहायता देने का भरोसा दिया है। विश्व बैंक की तरफ से 16.7 करोड़ डॉलर का रियायती कर्ज, अमेरिका से 5 लाख डॉलर और ऑस्ट्रेलिया से 10 लाख डॉलर की आर्थिक मदद मिलने की बात पक्की हो चुकी है। स्विट्जरलैंड की तरफ से भी संयुक्त राष्ट्र के जरिए खर्च करने के लिए 10 लाख स्विस फ्रैंक की सहायता राशि मिल चुकी है।

कम्युनिकेशन और शवों का प्रबंधन

आपदा की वजह से नेपाल टेलिकॉम के 38 और एनसेल के 27 मोबाइल टावर खराब हो गए थे, जिन्हें ठीक करने का काम तेजी से हुआ है। अब तक नेपाल टेलिकॉम के 106 और एनसेल के 75 टावर दोबारा चालू कर दिए गए हैं ताकि बातचीत का सिलसिला फिर से शुरू हो सके। इसके अलावा प्रभावित इलाकों में संपर्क साधने के लिए 20 सैटेलाइट फोन भी भेजे गए हैं। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि बाढ़ के पानी से अब तक 781 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। सेना और पुलिस के जवान इन शवों को पूरे सम्मान के साथ संभाल रहे हैं। जिन लोगों के शवों की पहचान हो गई है, उन्हें उनके परिवार वालों को सौंपा जा रहा है और जिनकी पहचान नहीं हो पा रही है, उनके डीएनए सैंपल और दूसरे सबूत सुरक्षित रखकर कानून के मुताबिक उनका अंतिम प्रबंधन किया जा रहा है। सरकार इस मुश्किल समय में हर नागरिक के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और राहत के साथ-साथ पुनर्निर्माण का काम तब तक जारी रहेगा जब तक हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाते।

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