नेपाल में बाढ़ के बाद 500 से ज्यादा बच्चे शेल्टर में, माता-पिता की तलाश जारी.

Aanya22 September 20263 min read1 viewWorld
नेपाल में बाढ़ के बाद 500 से ज्यादा बच्चे शेल्टर में, माता-पिता की तलाश जारी.

नेपाल में बीते 26 अगस्त को आए विनाशकारी बाढ़ और भारी तबाही के बाद हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। देश भर के अलग-अलग अस्थायी शेल्टर कैंपों में 500 से अधिक बच्चे अभी भी रहने को मजबूर हैं। इनमें से कई ऐसे मासूम बच्चे हैं जो अपनों की तलाश में हैं या जिनके माता-पिता इस आपदा में दुनिया छोड़ चुके हैं या फिर अभी तक उनका कोई पता नहीं चल पाया है। इस दर्दनाक स्थिति ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है और राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित परिवारों की मदद के लिए जुटी हुई हैं।

राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद की रिपोर्ट और बच्चों का दर्द

राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद द्वारा किए गए एक त्वरित सर्वे के मुताबिक, 4 सितंबर तक रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों के कुल 30 होल्डिंग सेंटर्स में 1,233 बच्चों की पहचान की गई थी। इस चौंकाने वाले आंकड़े में 102 ऐसे बच्चे शामिल हैं जिनमें 49 लड़कियां और 53 लड़के हैं, जिन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है। इसके अलावा 439 बच्चे ऐसे हैं जो अपने परिवार से बिछड़ गए थे और इस सूची में 21 दिव्यांग बच्चे भी शामिल हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इस आपदा ने लगभग 1.6 मिलियन लोगों को प्रभावित किया है, जो त्रिशूल नदी के 72 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गोरखा और तनहुन जिलों तक फैली थी। नुवाकोट जिले के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल को ही शेल्टर बना दिया गया है, जहां नौ साल के राम ठाकुर जैसे कई बच्चे अन्य बच्चों के साथ रहने को मजबूर हैं।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

नेपाली सरकार का केयर प्लान और राहत कार्य

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाली सरकार ने पिछले महीने 22 सितंबर को एक विशेष 'केयर Plan' पेश किया। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित आवास, मेडिकल सुविधाएं और मानसिक सहयोग यानी साइकोसोशुल सपोर्ट देना है ताकि परिवार से बिछड़े बच्चों को उनके अपनों से फिर से मिलाया जा सके। हालांकि, इस राहत प्रक्रिया में परिवारों के सामने मृत प्रमाण पत्र यानी डेथ सर्टिफिकेट बनवाने को लेकर बड़ी कानूनी अड़चनें आ रही हैं। आमतौर पर नेपाल के कानून के मुताबिक किसी व्यक्ति के लापता होने के 12 साल बाद ही उसे मृत घोषित किया जाता है, लेकिन आपदा नियमों के तहत परिवार जिला अदालतों में आवेदन कर सकते हैं ताकि उन्हें सरकारी मुआवजा और राहत मिल सके। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी इस पूरी राहत प्रक्रिया की देखरेख कर रही है।

अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की मदद और बढ़ता मौत का आंकड़ा

इस संकट की घड़ी में UNICEF और Save the Children जैसी बड़ी संस्थाएं जमीन पर उतरकर लगातार काम कर रही हैं। इन संगठनों ने मिलकर प्रभावित इलाकों में 13 चाइल्ड-फ्रेंडली स्पेसेज़ बनाए हैं। यूनिसेफ की नेपाल प्रतिनिधि एलिस अकुंगा ने विस्थापितों के गहरे मानसिक दर्द का जिक्र किया है, वहीं सेव द बच्चों की तारा छेत्री ने बच्चों की सुरक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के लगभग 2,600 बच्चों को गंभीर रूप से कुपोषित होने के कारण तुरंत इलाज की जरूरत है, जबकि 10,500 गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी पोषाहार सहायता दी जा रही है। इसके अलावा 'एजुकेशन कैनॉट वेट' संगठन ने 1 लाख डॉलर की राशि दान की है जिससे 17,000 बच्चों की पढ़ाई में मदद मिल सके, क्योंकि बाढ़ की वजह से 35 स्कूल पूरी तरह तबाह हो गए हैं और 25 अन्य स्कूलों को फिलहाल शेल्टर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। बाढ़ की वजह से अब तक कम से कम 1,410 लोगों की मौत हो चुकी है, 9,287 लोग घायल हुए हैं और 6,145 लोग अभी भी लापता हैं जिनकी तलाश जारी है।

Share:

Comments

Leave a comment