नेपाल में भयानक बाढ़ से 2.56 अरब डॉलर का नुकसान, 1290 लोगों की मौत और हजारों लोग लापता.

Aanya4 September 20263 min read25 viewsWorld
नेपाल में भयानक बाढ़ से 2.56 अरब डॉलर का नुकसान, 1290 लोगों की मौत और हजारों लोग लापता.

नेपाल में ग्लेशियर टूटने की वजह से आई विनाशकारी बाढ़ ने देश भर में भारी तबाही मचाई है और आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। नेपाल सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह भयानक आपदा 26 अगस्त 2026 को नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर ढहने से शुरू हुई थी। इस प्राकृतिक आपदा के कारण संपत्ति, मकानों और जरूरी बुनियादी ढांचे को कुल $2.56 billion यानी लगभग ढाई अरब डॉलर से ज्यादा का भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती जमीनी हालात को देखते हुए सरकार का मानना है कि आने वाले चार महीनों में केवल शुरुआती राहत और बहाली के कामों के लिए अतिरिक्त $52.6 million की भारी-भरकम राशि की जरूरत पड़ेगी। विदेश मंत्री Mr. Shisir Khanal ने 3 सितंबर 2026 को एक आधिकारिक कूटनीतिक ब्रीफिंग के दौरान यह साफ किया कि जमीन पर तबाही का यह मंजर शुरुआती तस्वीरों और अनुमानों से कहीं ज्यादा भयानक है, जिसके बारे में विदेश मंत्रालय नेपाल की आधिकारिक जानकारी में भी बताया गया है।

राहत और बचाव कार्य में आ रही हैं भारी मुश्किलें

नेपाल पुलिस से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, इस आपदा में मरने वालों की पुष्टि की गई संख्या बढ़कर 1,290 तक पहुंच चुकी है, जबकि 4,700 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इन लापता लोगों में 2,847 नेपाली नागरिक और 601 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। सुरक्षा बलों द्वारा देश भर में राहत और बचाव अभियान अभी भी तेजी से चलाए जा रहे हैं, खासकर हाइड्रोपावर टनल यानी जलविद्युत सुरंगों के अंदर जहां 12 अलग-अलग परियोजनाओं में लगभग 900 मजदूरों के फंसे या लापता होने की खबर है। हालांकि, राहत की एक छोटी सी खबर यह आई कि 4 सितंबर 2026 को त्रिशूल 3A सुरंग से दो मजदूरों Sanjay Shah और Kabir Maharjan को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इस आपदा ने देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवहन व्यवस्था को भी बुरी तरह तोड़ दिया है, जिसमें कुल 41 पुल पूरी तरह तबाह हो गए हैं और 19 अन्य पुलों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, करीब 40 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़कें भी बाढ़ के पानी में बह गई हैं या खराब हो गई हैं, जैसा कि राहत वेब नेपाल फ्लैश अपडेट में विस्तार से दर्ज किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय मदद और मानवीय संकट की स्थिति

इस गंभीर मानवीय संकट की वजह से लगभग 10,000 परिवार, यानी करीब 50,000 लोग ऐसे हैं जिन्हें तुरंत पीने का साफ पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाएं देने की सख्त जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन UN Women की एशिया और प्रशांत क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक Christine Arab ने भी इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि इस आपदा के कारण करीब 43,000 महिलाओं और बच्चियों के सामने भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षित पानी की भारी कमी पैदा हो गई है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि नेपाल सरकार ने अपने देश के संसाधनों से बाहर जाकर Fund for Responding to Loss and Damage (FRLD) से आपातकालीन वित्तीय सहायता की आधिकारिक मांग की है। देश की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए दूसरे देशों और संगठनों ने भी मदद का हाथ बढ़ाना शुरू कर दिया है। यूरोपीय संघ यानी European Union ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए €2 million यानी 2 मिलियन यूरो की सहायता राशि मंजूर की है, जबकि भारत सरकार ने भी दरियादिली दिखाते हुए 47.5 tonnes यानी साढ़े सैंतालीस टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है जिसमें आपातकालीन टेंट और जरूरी दवाइयां शामिल हैं, जिसकी पुष्टि यूरोपीय संघ की मानवीय सहायता रिपोर्ट में की गई है।

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