नेपाल में बाढ़ का कहर, 783 मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान और सैकड़ों लोग लापता.

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिससे देश के ऊर्जा सेक्टर को बड़ा झटका लगा है। रसुवा और नुवाकोट जिलों में बाढ़ के कारण कुल 783 मेगावाट क्षमता की जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। इस आपदा की पूरी जानकारी राष्ट्रीय योजना आयोग और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण की एक संयुक्त तकनीकी टीम द्वारा तैयार की गई त्वरित क्षति एवं आवश्यकता आकलन रिपोर्ट में सामने आई है। बाढ़ की वजह से आम जनजीवन तो अस्त-व्यस्त हुआ ही है, साथ ही देश के बिजली उत्पादन और सड़क ढांचे को भी तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
अनेक बड़ी परियोजनाएं हुईं प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ की चपेट में कुल 13 जलविद्युत परियोजनाएं और करीब 24 मेगावाट क्षमता की पांच सौर ऊर्जा परियोजनाएं आई हैं। सबसे ज्यादा असर ऊर्जा और सड़क नेटवर्क पर देखने को मिला है। जिन प्रमुख परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है, उनमें 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1, 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी, 120 मेगावाट की रसुवा-भोटेकोशी, 20 मेगावाट की लांगटांग खोला, 22 मेगावाट की चिलिमे, 5 मेगावाट की मैलुंग खोला और 24 मेगावाट का त्रिशूली हाइड्रोपावर सेंटर शामिल हैं। इसके अलावा 14.1 मेगावाट का देवीघाट, 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए, 37 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3बी, 15.6 मेगावाट की मिडिल त्रिशूली गंगा और 25 मेगावाट क्षमता वाली नुवाकोट सौर ऊर्जा परियोजना को भी क्षति पहुंची है। इन तमाम प्रोजेक्ट्स के बिजली उत्पादन ढांचे, आने-जाने के रास्ते और ट्रांसमिशन सिस्टम पूरी तरह से तहस-नहस हो गए हैं।
पुनर्निर्माण पर होगा भारी खर्च
आपदा के बाद देश की ऊर्जा और ग्रिड प्रणाली को फिर से ठीक करने और उसका पुनर्निर्माण करने के लिए भारी-भरकम राशि की जरूरत होगी। सरकारी आकलन के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लगभग 3 खरब 90 अरब 62 करोड़ नेपाली रुपये का अनुमानित खर्च आएगा। क्षतिग्रस्त संरचनाओं के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हुई है, जिसे सामान्य करने में लंबा समय लग सकता है। तकनीकी दल और विशेषज्ञ लगातार स्थिति का जायजा ले रहे हैं ताकि जल्द से जल्द राहत और सुधार के कार्य शुरू किए जा सकें।
कर्मचारियों और श्रमिकों की तलाश जारी
इस आपदा का सबसे डरावना पहलू यह है कि बाढ़ प्रभावित इन परियोजनाओं में काम करने वाले 917 कर्मचारी और श्रमिक अभी भी लापता हैं। घटना को दो हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। लापता लोगों की तलाश के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल, नेपाल पुलिस के साथ-साथ विभिन्न देशों के विशेषज्ञ और तकनीकी दल दिन-रात राहत और बचाव अभियान में जुटे हुए हैं। संबंधित कंपनियों के तकनीकी विशेषज्ञ भी इस काम में पूरा सहयोग कर रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द सच्चाई का पता लगाया जा सके और पीड़ित परिवारों को राहत मिल सके। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट देख सकते हैं।