दिल्ली में रहने वाले नेपाली प्रवासियों पर टूटा दुखों का पहाड़, नेपाल में भयानक बाढ़ से कई लोग लापता.

दिल्ली और आसपास के इलाकों में रहने वाले नेपाली प्रवासियों के लिए इन दिनों समय बहुत मुश्किलों भरा चल रहा है। बुधवार, 26 अगस्त 2026 को नेपाल में आए भयानक फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ के बाद से दिल्ली के प्रवासी अपने परिवार के लोगों की तलाश में परेशान घूम रहे हैं। कई लोगों के घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और फोन तथा अन्य बातचीत के सभी साधन बंद होने की वजह से अपनों की कोई खबर नहीं मिल पा रही है। बहुत से लोग अपने परिवार की सुरक्षा जानने के लिए बेचैन हैं और हालात का जायजा लेने तथा बचाव कार्य में मदद करने के लिए खुद नेपाल जाने की योजना बना रहे हैं।
भयंकर प्राकृतिक आपदा से भारी तबाही
यह बड़ी आपदा नेपाल और तिब्बत की सीमा पर स्थित हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के टूटने और उसके मलबे के बहाव के कारण आई थी। इस भयानक हादसे की वजह से बहुत बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है। गुरुवार, 27 अगस्त 2026 तक नेपाल पुलिस ने कुल 157 शवों को बरामद कर लिया है। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार करीब 823 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं, जिनमें कम से कम 579 पर्यटक भी शामिल हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस बात की पुष्टि की है कि लापता लोगों में 300 से अधिक भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ, चीन के सरकारी मीडिया ने तिब्बत में 3 लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की खबर दी है, जिसमें 260 विदेशी नागरिक हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के 34, यूक्रेन के 53 और मलेशिया के 17 नागरिकों के भी लापता होने की बात सामने आई है।
नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांवों को नुकसान
अमरीकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार यह घटना कोई भूकंप नहीं बल्कि एक रॉक-आइस एवलॉन्च यानी चट्टान और बर्फ का बड़ा खिसकाव था। इसकी वजह से ल्हेंडे नदी का रास्ता रुक गया और पीछे से पानी का तेज बहाव आया जिससे गांवों, सड़कों, पुलों और कम से कम 9 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा। इस आपदा ने नेपाल के रसुवा, धाडिंग, नुवाकोट, चितवन और गोरखा जिलों के साथ-साथ तिब्बत के जिरोंग काउंटी को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया है। इस दौरान भोटे कोसी, त्रिशूली और नारायणी नदियों में पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था।
राहत और बचाव कार्य जारी
इस संकट की घड़ी में अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मदद के हाथ बढ़ाए जा रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री न Narendra Modi ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालें शाह से बातचीत करके हरसंभव मदद देने का वादा किया है। भारतीय गृह मंत्रालय ने बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इलाकों में नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स यानी एनडीआरएफ की टीमों को तैनात कर दिया है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस घटना पर दुख जताते हुए एकजुटता दिखाई है और कहा है कि संयुक्त राष्ट्र की टीमें राहत कार्यों में पूरी मदद कर रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र के विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की आपदाओं के असर को कम करने के लिए रियल-टाइम सेंसर और निगरानी प्रणालियों को जल्द से जल्द बेहतर बनाया जाना चाहिए।