नेपाल में बाढ़ का कहर, मानसरोवर यात्रा के लिए हिल्सा बना नया वैकल्पिक मार्ग.

Sushma Kumari22 September 20263 min read0 viewsIndia
नेपाल में बाढ़ का कहर, मानसरोवर यात्रा के लिए हिल्सा बना नया वैकल्पिक मार्ग.

नेपाल में हाल ही में आई भारी बाढ़ के कारण उत्तरी सीमा के प्रमुख रास्ते पूरी तरह से प्रभावित हो गए हैं, जिससे तीर्थयात्रा करने वाले लोगों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई थी। इस प्राकृतिक आपदा के बीच नेपाल का उत्तरी सीमा नाका हिल्सा (हुम्ला) एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है और भारत से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग बनकर सामने आया है। खराब मौसम और नदी के उफान के चलते मुख्य रास्तों के बंद होने पर इस नए रास्ते ने लोगों की यात्रा को आसान बनाने का काम किया है।

बाढ़ की वजह से बदले रास्ते और पर्यटकों की वापसी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोटेकोशी नदी में भयंकर बाढ़ आ गई थी जिसके कारण केरुंग और तातोपानी नाका पूरी तरह से प्रभावित हो गए थे। इन मुख्य रास्तों के बंद होने की वजह से तिब्बत के हिस्से में पहले से ही पहुंच चुके 150 से अधिक भारतीय पर्यटक वहीं फंस गए थे जिन्हें बाद में इसी नए वैकल्पिक मार्ग के जरिए सुरक्षित नेपाल वापस लाया गया। ये सभी पर्यटक सबसे पहले हिल्सा पहुंचे और वहां से सड़क मार्ग के जरिए सिमकोट गए, जिसके बाद उन्होंने हवाई जहाज पकड़कर नेपालगंज के रास्ते अपने गंतव्य की ओर सुरक्षित वापसी की। इस पूरी प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि आपातकालीन स्थिति में यह मार्ग कितना उपयोगी साबित हो सकता है।

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पर्यटन व्यवसायियों और अधिकारियों की उठी मांग

इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों का मानना है कि इस रास्ते को केवल एक आपातकालीन विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पर्यटन एवं होटल व्यवसायी नोर्बु लामा ने इस बात पर जोर दिया है कि हिल्सा के जरिए हाल ही में हुए पर्यटकों के इस सफल आवागमन को एक दीर्घकालीन पर्यटन योजना के साथ जोड़ने की बेहद जरूरत है। उनका ऐसा कहना है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग इस नाके पर सड़क की स्थिति और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बना देते हैं, तो यह भविष्य में मानसरोवर और कैलाश यात्रा के लिए एक नियमित प्रवेश और आवागमन का मुख्य ट्रांजिट हब बन सकता है। इससे न केवल पर्यटकों की आवाजाही सुगम होगी बल्कि स्थानीय स्तर पर व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन सेवाओं, गाइडों, ट्रेकिंग और रोजगार के नए अवसरों में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

प्रशासन की नजर में हिल्सा का महत्व

हुम्ला जिले के प्रमुख जिला अधिकारी भोलानाथ गुरागाईं ने भी इस बात की पुष्टि की है कि भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद जब केरुंग की तरफ यातायात पूरी तरह से ठप हो गया था, तब तिब्बत पहुंच चुके लेकिन सामान्य रास्तों से वापस नहीं लौट पा रहे पर्यटकों के लिए हिल्सा ही एकमात्र बड़ा सहारा बना। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन इस क्षेत्र में सड़क संपर्क और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त कर देता है, तो यह आने वाले समय में एक बेहद प्रभावी और स्थायी वैकल्पिक मार्ग बन सकता है। इस क्षेत्र को व्यवस्थित और सुगम बनाने से पर्यटकों को तो फायदा मिलेगा ही, साथ ही देश की सरकार के राजस्व में भी अच्छी खासी वृद्धि दर्ज की जा सकेगी।

यात्रा का समय और खर्च का गणित

रसुवागढ़ी और तातोपानी जैसे मुख्य नाकों पर बाधा उत्पन्न होने के बाद कुछ ट्रैवल एजेंसियों ने तो अपनी यात्राएं रद्द कर दीं, लेकिन अधिकांश ने समझदारी दिखाते हुए अपने पर्यटकों को इसी वैकल्पिक मार्ग से मानसरोवर की तरफ रवाना किया। कैलाश मानसरोवर टूर ऑपरेटर्स नेपाल के महासचिव प्रदीप पंडित के अनुसार, काठमांडू से ल्हासा जाने वाली विमान सेवा का केवल एक तरफ का किराया ही लगभग एक लाख नेपाली रुपये बैठता है, जिसकी वजह से वह हवाई मार्ग आम लोगों के लिए काफी महंगा साबित होता है। इसके विपरीत, यदि सामान्य परिस्थितियों की बात करें तो काठमांडू से रसुवा के रास्ते मानसरोवर पहुंचने में लगभग 13 दिन का समय लग जाता है, जबकि नेपालगंज-सिमकोट-हिल्सा वाले इस नए रूट से यात्रा करने पर लगभग दो दिन कम समय में ही यह पूरी यात्रा आसानी से पूरी की जा सकती है।

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