नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन का कहर: 19 बिजली परियोजनाएं फिलहाल ठप, उत्पादन पर बड़ा असर

नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने देश की ऊर्जा व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है। प्राकृतिक आपदा के कारण 620 मेगावाट क्षमता वाली 19 प्रमुख बिजली परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिनका तत्काल संचालन फिर से शुरू होना अब नामुमकिन लग रहा है।
बिजली उत्पादन पर भारी पड़ा प्राकृतिक कहर
भोटेकोशी में आई विनाशकारी बाढ़ और पिछले सप्ताह हुई मूसलाधार बारिश ने नेपाल की बिजली उत्पादन क्षमता को गंभीर संकट में डाल दिया है। इस आपदा के कारण कुल 1,292 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त को आई बाढ़ से भी 430.8 मेगावाट क्षमता वाली 12 परियोजनाएं प्रभावित हुई थीं, जिन्हें तुरंत चालू करना संभव नहीं है।
प्रभावित परियोजनाओं में मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- रसुवागढ़ी: 111 मेगावाट
- सान्जेन: 78 मेगावाट
- अपर त्रिशूली-3ए: 60 मेगावाट
- लोअर सान्जेन: 42.5 मेगावाट
- त्रिशूली: 24 मेगावाट
- एनईए सोलर: 25 मेगावाट
- चिलिमे: 22.1 मेगावाट
- लांगटांग: 20 मेगावाट
बाढ़ के कारण इन परियोजनाओं के पावरहाउस, बांध और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते अब इनके पुनर्निर्माण की आवश्यकता होगी।
ट्रांसमिशन लाइनों को भी पहुंचा नुकसान
सिर्फ बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि बिजली के वितरण तंत्र को भी भारी नुकसान हुआ है। 16-20 सितंबर के बीच हुई लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण 220 केवी कालीगंडकी कॉरिडोर का कुश्मा-दाना खंड क्षतिग्रस्त हो गया है। इस वजह से तीन ट्रांसमिशन टावर पूरी तरह से तबाह हो गए हैं, जिससे 190 मेगावाट क्षमता वाली सात परियोजनाओं का बिजली उत्पादन रुक गया है।
इन प्रभावित परियोजनाओं में नीलगिरि-1, नीलगिरि-2, मिस्त्री, थापाखोला, घारखोला, रेलेखोला और घलेम्दी शामिल हैं। प्रसारण संरचनाओं की मरम्मत होने के बाद ही इन क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बहाल हो पाएगी।
राहुघाट परियोजना की स्थिति
राहुघाट जलविद्युत परियोजना, जिसने हाल ही में परीक्षण उत्पादन शुरू किया था, वह भी इस आपदा की चपेट में आ गई है। परियोजना के टेलरेस गेट और डक्ट में क्षति हुई है, जबकि टर्बाइन फ्लोर में पानी भर गया है। हालांकि परियोजना का स्विचयार्ड सामान्य है, लेकिन सफाई और मरम्मत के बाद इसे फिर से शुरू करने में कम से कम 10 दिन का समय लग सकता है।
राहत की बात यह है कि कुछ अन्य परियोजनाओं, जैसे कालीगंडकी और मर्स्यांग्दी कॉरिडोर की परियोजनाओं में उत्पादन फिर से शुरू हो चुका है।