नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए शुरू हुआ सामूहिक अंतिम संस्कार, मरने वालों का आंकड़ा पहुंचा 1003

नेपाल में हाल ही में आई भयंकर बाढ़ और तबाही के बाद अब सरकार ने एक बड़ा और कठिन कदम उठाया है। हिमालयी घाटियों में पानी और पत्थरों के सैलाब के कारण जान गंवाने वाले लोगों के शवों को सुरक्षित रखने की जगह नहीं बची, जिसके बाद प्रशासन ने सामूहिक रूप से दफनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस आपदा में अब तक 1,003 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 3,916 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिससे इस आपदा का दायरा और भी बड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री Balendra Shah ने इस स्थिति को बेहद दिल दहला देने वाला बताया है और प्रशासन को पूरी पारदर्शिता के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं।
कड़े नियमों के तहत हो रहा है अंतिम संस्कार
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सामूहिक दफनाने की यह प्रक्रिया किसी भी जल्दबाजी में नहीं बल्कि एक सख्त नियम के तहत की जा रही है। अधिकारियों ने 29 अगस्त 2026 को आधिकारिक तौर पर 'Unidentified and Unclaimed Bodies Management (First Amendment) Directive, 2026' लागू किया था। इस नियम के तहत शवों को जमीन में दफनाने से पहले उनके डीएनए सैंपल और शरीर के खास पहचान चिह्नों को सुरक्षित किया जा रहा है। चितवन जिले के मुख्य जिला अधिकारी Ganesh Aryal ने जानकारी दी कि शवों के जल्दी सड़ने और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर मंडराते खतरे को देखते हुए यह फैसला लेना जरूरी हो गया था। शवों को प्लास्टिक में पैक करके कम से कम 2.5 मीटर गहरे गड्ढे में दफनाया जा रहा है। हर कब्र पर 'BHF' जैसे एक यूनीक नंबर के साथ जीपीएस लोकेशन, फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग भी दर्ज की जा रही है ताकि भविष्य में पहचान होने पर परिजनों को आसानी हो सके।
राहत और बचाव कार्यों में तेजी
मंगलवार को पुलिस ने नुवाकोट जिले के एक ही घर से 24 शव बरामद किए, जबकि भारत की तरफ बहकर गई नदियों से भी 17 शव मिले हैं। नेपाल-चीन सीमा के पास अभी भी मलबा हटाने का काम जारी है और राहत टीमों ने अब तक कुल 11,814 लोगों की जान बचाई है। इसके अलावा, नेपाल में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे हुए मजदूरों को बाहर निकालने के लिए भी रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार चलाया जा रहा है। प्रवक्ता Rajendra Prasad Dhamala ने बताया कि बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण उन्हें संभालना मुश्किल हो रहा था, इसलिए यह कदम उठाया गया। हालांकि, पुलिस अधिकारी Sharmila Mahato ने यह भी स्पष्ट किया कि पहचान पक्की होने के बाद परिवार वाले अपने अपनों के शव वापस ले सकेंगे। इस मुश्किल समय में भारत और चीन जैसे पड़ोसी देश भी नेपाल की मदद के लिए आगे आए हैं और अपनी विशेष टीमें तथा राहत सामग्री भेज रहे हैं।