नेपाल बाढ़ के 10 दिन बाद भी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तक नहीं पहुंची रेस्क्यू टीम, 93 कर्मचारी अब भी लापता

Praggya Singh sabal5 September 20264 min read27 viewsWorld
नेपाल बाढ़ के 10 दिन बाद भी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तक नहीं पहुंची रेस्क्यू टीम, 93 कर्मचारी अब भी लापता

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ को बीते हुए 10 दिन हो चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी राहत और बचाव कार्य पूरी तरह से पटري पर नहीं आ पाए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा जिले में स्थित रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना के पावरहाउस की सुरंग में फंसे कर्मचारियों तक अभी तक रेस्क्यू टीम के पहुंचने में सफलता नहीं मिल पाई है। इस खतरनाक स्थिति के बीच सुरंग के अंदर करीब 12 कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका लगातार बनी हुई है, जबकि इस पूरी परियोजना में काम करने वाले कुल 93 लोग अभी भी पूरी तरह से संपर्कविहीन बताए जा रहे हैं। इस भयानक हादसे ने प्रभावित परिवारों की चिंता को और अधिक बढ़ा दिया है जो अपनों की सुरक्षित वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

परियोजना प्रबंधन और उपकरणों की भारी कमी

परियोजना प्रबंधन से मिली जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार शाम तक भी बचाव अभियान के लिए बेहद जरूरी सभी भारी उपकरण और मशीनरी घटनास्थल तक नहीं पहुंचाई जा सके हैं। रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर कंपनी से संपर्क से बाहर चल रहे 93 कर्मचारियों में कुल 51 नियमित कर्मचारी, 1 संचालक, 2 दैनिक मजदूर और 3 ठेकेदार कंपनियों के 39 कर्मचारी शामिल हैं। पावरहाउस की सुरंग के अंदर फंसे हुए लोगों तक सुरक्षित पहुंचने का एकमात्र रास्ता यही है कि सबसे पहले सुरंग के भीतर भारी मात्रा में जमा कीचड़ और मलबे को हटाया जाए। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए मिनी एक्स्कावेटर, 30 केवीए डीजल जनरेटर, सबमर्सिबल पंप और होज पाइप जैसे तमाम जरूरी उपकरणों को बीते 2 अगस्त को ही नुवाकोट के मैथली आर्मी कैंप, बट्टार में पैक करके रख दिया गया था। इन तमाम उपकरणों को धुन्चे के रास्ते होते हुए परियोजना स्थल तक पहुंचाने की पूरी योजना बनाई गई थी।

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रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रही प्राकृतिक रुकावटें

नेपाली सेना की बचाव टीम ने जब इस पूरे पावरहाउस तक पहुंचने के लिए इलाके की दोबारा रेकी की, तो स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण नजर आई। सेना के अनुसार पावरहाउस के ठीक पास बहने वाली नदी ने मिट्टी का और अधिक कटाव कर दिया है, जिसके कारण भारी भरकम उपकरणों को ले जाने में बड़ी दिक्कत आ रही है। सेना ने साफ बताया कि भारी उपकरणों के साथ बड़े एमआई-17 हेलीकॉप्टर को उस संकीर्ण स्थान पर उतारना बिल्कुल भी संभव नहीं है। इस बड़ी मुश्किल के बाद प्रशासन ने कम क्षमता और कम वजन वाले जनरेटर की वैकल्पिक व्यवस्था की। हालांकि, मिनी एक्स्कावेटर और बड़े डीजल जनरेटर को फिलहाल वहीं छोड़कर बिजली से संबंधित अन्य जरूरी सामग्री और सामान को धुन्चे तक पहुंचाया जा चुका है, लेकिन यह सारा सामान अभी भी धुन्चे में ही सुरक्षित रखा हुआ है और आगे नहीं बढ़ पाया है।

रॉक क्लाइंबरों की ली जा रही है मदद

पावरहाउस के बाहरी इलाकों में लापता लोगों की तलाश और बचाव कार्य को तेज करने के लिए कंपनी ने नेपाल नेशनल माउंटेन गाइड एसोसिएशन से जुड़े हुए अनुभवी रॉक क्लाइंबरों की एक विशेष टीम को भी इस अभियान में उतार दिया है। कंपनी ने बीते 3 अगस्त को हिमालय समिट क्लब प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक जरूरी समझौता किया था। इस समझौते के तहत इन पेशेवर रॉक क्लाइंबरों को घट्टेखोला कैंप और उसके आसपास के तमाम ऊंचे इलाकों में चार दिनों के लिए ग्राउंड सर्च ऑपरेशन के वास्ते तैनात किया गया है। कंपनी के अनुसार यह विशेष टीम फिलहाल टिमुरे क्षेत्र में मौजूद है और इसे एक अन्य हेलीकॉप्टर की मदद से घट्टेखोला ले जाकर वहां तलाशी अभियान चलाने की पूरी योजना बनाई गई है ताकि जल्द से जल्द कोई सुराग मिल सके।

परिजनों के लिए बनाई गई विशेष सूचना व्यवस्था

कंपनी ने अपने सभी कर्मचारियों और विशेष तौर पर संपर्कविहीन कर्मचारियों के परिवार तथा रिश्तेदारों को इस बचाव अभियान की पल-पल की स्थिति से अवगत कराने के लिए एक खास व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किया है। इस ग्रुप के माध्यम से तलाशी और बचाव अभियान के दौरान सामने आने वाली हर छोटी-बड़ी जानकारी तथा अब तक प्रशासन द्वारा किए गए सभी प्रयासों को पारदर्शी तरीके से साझा किया जा रहा है। इसके अलावा कंपनी के संचालक भी नियमित रूप से अपने कार्यालय में उपस्थित रहकर वहां पहुंचने वाले परिजनों को ताजा स्थिति की जानकारी देने की पूरी व्यवस्था संभाल रहे हैं।

आगे की प्रशासनिक तैयारियां और मौसम का इंतजार

इस खोज और बचाव अभियान के लिए आपसी तालमेल और समन्वय को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से नुवाकोट के बट्टार में एक वरिष्ठ इंजीनियर समेत कुल दो लोगों को विशेष रूप से तैनात किया गया है। वहीं दूसरी ओर, रसुवा के धुन्चे में भी दो इंजीनियरों को पूरी तरह से तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। पावरहाउस के अंदर बचाव दल को बिजली कनेक्शन से जुड़े सभी तकनीकी कार्यों में मदद देने के लिए एक इलेक्ट्रिकल ओवरसियर को भी मौके पर लगाया गया है। कंपनी के मुताबिक धुन्चे में मौजूद नेपाली सेना की विशेष बचाव टीम इस समय पूरी तरह से अनुकूल मौसम का इंतजार कर रही है। जैसे ही मौसम पूरी तरह से साफ होगा, यह टीम अपने सभी जरूरी उपकरणों के साथ तुरंत पावरहाउस पहुंचेगी और इस चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान को आगे बढ़ाएगी। बाढ़ के इतने दिन बीत जाने के बाद भी लगातार आ रही बाधाओं ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहद कठिन बना दिया है, और अब हर किसी की निगाहें केवल मौसम में सुधार तथा भारी उपकरणों के परियोजना स्थल तक पहुंचने पर टिकी हुई हैं। अधिक जानकारी के लिए हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट देख सकते हैं।

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