नेपाल में भयानक बाढ़ का कहर, 3 हजार से ज्यादा लोग लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी.

हिमालय में ग्लेशियर टूटने की वजह से नेपाल में आए विनाशकारी बाढ़ और भारी तबाही के बाद अब भी राहत और बचाव का काम बहुत तेजी से चल रहा है। 30 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल और तिब्बत को मिलाकर इस बड़ी आपदा में कुल 750 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले नेपाल देश के भीतर ही 734 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है और 2,498 लोग अभी भी लापता हैं। इस भयानक प्राकृतिक आपदा ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है और प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशों में जुटा हुआ है।
लापता लोगों में विदेशी नागरिक और मजदूर भी शामिल
नेपाल सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, लापता होने वाले लोगों में बड़ी संख्या में विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं यानी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले मजदूर और दूसरे देशों के नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल में लापता होने वालों में 589 विदेशी नागरिक और विभिन्न हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के 933 वर्कर भी शामिल हैं। इसके अलावा चीन के अधिकारियों ने तिब्बत क्षेत्र में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है, जिसमें 100 से ज्यादा नेपाली नागरिक और एक दर्जन से अधिक अन्य देशों के लोग भी शामिल हैं। इस बारे में अधिक जानकारी आप नेपाल विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
खराब मौसम और लगातार बारिश से बचाव कार्य में आ रही है रुकावट
ऊर्जा मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने बताया कि रातभर हुई भारी बारिश की वजह से नदियों का जलस्तर काफी बढ़ गया है और खुदाई वाली जगहों पर फिर से पानी भर गया है। इस वजह से राहत और बचाव अभियानों में बहुत ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं, खासकर उन हाइड्रोपावर टनल यानी सुरंगों के पास जहां 100 से ज्यादा मजदूर अभी भी फंसे हो सकते हैं। ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बास्नेत ने यह भी बताया कि भारी कीचड़ और हेलीकॉप्टर के उतरने के लिए सही जगह न होने की वजह से भी रेस्क्यू ऑपरेशन में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। NDRRMA ने भोटेकोशी नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर नया अलर्ट जारी किया है और रसुवा, नुवाकोट, धादिंग तथा चितवन के लोगों और बचाव टीमों को बेहद सतर्क रहने के लिए कहा है।
पड़ोसी देशों से मांगी गई मदद और अंतरराष्ट्रीय सहायता
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि लापता लोगों को ढूंढना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और नेपाल ने सुरंगों में बचाव कार्य, फॉरेंसिक डीएनए जांच और शवगृह के लिए रेफ्रिजरेशन जैसी खास मदद के लिए अपने पड़ोसी देशों से अनुरोध किया है। काठमांडू से अल जजीरा की रिपोर्टर मिनेंले फर्नांडीज ने बताया कि नेपाली सरकार ने भारत और चीन से विशेषज्ञ सहायता मांगी है ताकि जरूरी कमियों को पूरा किया जा सके। भारत ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 11 सदस्यीय टनल रेस्क्यू रिकॉनेछेंस टीम भेजी है और 57 मीट्रिक टन से ज्यादा राहत सामग्री पहुंचाई है। वहीं दूसरी तरफ, चीन ने भी अपने एक्सपर्ट्स को भेजा है और सैटेलाइट तथा हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने में सहयोग कर रहा है। इस संबंध में ताजा अपडेट नेपाल के विदेश मंत्रालय के पोर्टल पर उपलब्ध है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नेपाल की मदद के लिए कई देश आगे आए हैं। अमेरिका ने 3.6 मिलियन डॉलर, यूनाइटेड किंगडम ने 6.8 मिलियन डॉलर, संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन ने 2.5 मिलियन डॉलर और यूरोपीय संघ ने 2.3 मिलियन डॉलर की सहायता देने का वादा किया है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया की रेस्क्यू टीमें भी प्रभावित इलाकों में पहुंच चुकी हैं। रेड क्रॉस के अनुमान के मुताबिक इस भयानक बाढ़ से 90,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। बचाव अभियान के पांचवें दिन अधिकारियों ने परिवारों द्वारा भविष्य में पहचान के लिए डीएनए का पूरा रिकॉर्ड रखने के बाद बरामद किए गए शवों का अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है।