नेपाल में बाढ़ का कहर, पांचवें दिन भी बचाव अभियान जारी, मरने वालों का आंकड़ा पहुंचा 768

नेपाल देश में इन दिनों हालात बहुत ज्यादा खराब बने हुए हैं और लोग भारी मुसीबत का सामना कर रहे हैं। 26 अगस्त 2026 को शुरू हुई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बाद से बचाव दल लगातार पांचवें दिन भी राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटे हुए हैं। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक 30 अगस्त 2026 तक नेपाल और चीनी सीमा के पास कुल मिलाकर मरने वालों की संख्या 750 से 800 के बीच पहुंच चुकी है। अकेले नेपाल के भीतर ही 768 लोगों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि हो चुकी है जिनकी इस आपदा में जान चली गई है। इस भयंकर तबाही के बाद अब भी लगभग 3,000 से 3,048 लोग लापता बताए जा रहे हैं जिनकी तलाश लगातार की जा रही है। लापता होने वाले लोगों में 589 विदेशी नागरिक और 933 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के कर्मचारी भी शामिल हैं।
भोटेकोशी नदी का बढ़ा जलस्तर और प्रशासन की चेतावनी
बीती सुबह यानी 30 अगस्त को नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA ने रसुआ में भोटेकोशी नदी का पानी बढ़ने को लेकर बहुत जरूरी चेतावनी जारी की थी। रसुआ, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन के आसपास रहने वाले सभी स्थानीय लोगों को मोबाइल फोन पर मैसेज भेजकर पूरी तरह सतर्क रहने को कहा गया क्योंकि अधिकारी संभावित ग्लेशियर झील फटने की घटनाओं पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। मौसम वैज्ञानिक डेविड ढकाल ने इस क्षेत्र में हल्की से लेकर भारी बारिश होने की आशंका जताई थी जिससे हेलीकॉप्टर की उड़ानों को कुछ समय के लिए शुरू किए जाने के बावजूद बचाव कार्यों में लगातार रुकावट आ रही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार सरकार सुरंगों से लोगों को बाहर निकालने, डीएनए की पहचान करने और शवगृह सेवाओं के लिए दूसरे देशों से विशेष मदद मांगने की कोशिश कर रही है।
हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे मजदूरों को बचाने की जद्दोजहद
इस समय पूरा राहत और बचाव अभियान मुख्य रूप से उन 100 से ज्यादा मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है जो त्रिशूल 3ए और 3बी जैसी जगहों पर हाइड्रोपावर की सुरंगों के भीतर फंसे हुए हैं। देश के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने मीडिया को जानकारी दी कि सुरंगों में फंसे इन मजदूरों तक छोटे छेदों के जरिए लगातार हवा पहुंचाई जा रही है ताकि वे सांस ले सकें। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट यानी ICIMOD के आपदा विशेषज्ञ शाश्वत सान्याल ने इस बड़ी आपदा की मुख्य वजह एक बर्फ और चट्टान के टुकड़े से बने हिमस्खलन को बताया है जिसकी वजह से ल्हेंडे खोला नदी का रास्ता पूरी तरह रुक गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने प्रभावित इलाकों के लिए 150,000 अमेरिकी डॉलर यानी करीब डेढ़ लाख डॉलर का इमरजेंसी फंड जारी किया है और साथ ही बहुत जरूरी दवाइयां व मेडिकल सामान भी वहां भेज दिया है।
अंतरराष्ट्रीय टीमों का सहयोग और डीएनए पहचान प्रक्रिया
इस भारी तबाही से हुए नुकसान को ठीक करने के लिए भारत और चीन से आई विशेष बचाव टीमों ने नेपाल की स्थानीय एजेंसियों जैसे कि नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। आपदा के दौरान मलबे से निकाले जा रहे शवों की भविष्य में पहचान आसानी से हो सके इसके लिए उनके डीएनए सैंपल लेकर नियमों के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है। सरकार और राहत एजेंसियां मिलकर यह सुनिश्चित करने में लगी हैं कि जल्द से जल्द सभी लापता लोगों का पता लगाया जा सके और प्रभावित परिवारों तक जरूरी मदद पहुंचाई जा सके।