नेपाल में बाढ़ का कहर, एक हफ्ते बाद भी बचाव कार्य जारी, हजारों लोग अब भी लापता.

नेपाल में पिछले हफ्ते आए विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन को एक हफ्ता पूरा हो चुका है, लेकिन देश में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इस भयानक प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है, जबकि शुरुआती आंकड़े सिर्फ 1,003 मौतों की पुष्टि कर रहे थे। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने इस भारी तबाही के लिए सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया है, जिसके कारण देश के कई हिस्सों में भारी नुकसान हुआ है। पड़ोसी देश चीन के तिब्बत इलाके में भी इस आपदा के कारण 16 लोगों की मौत की पुष्टि स्थानीय अधिकारियों द्वारा की गई है।
लापता लोगों की तलाश और विदेशी नागरिकों की स्थिति
नेपाल में अभी भी लगभग 4,858 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय की तरफ से यह जानकारी दी गई कि 26 अगस्त को आई इस भीषण बाढ़ के बाद 39 अलग-अलग देशों के कुल 590 विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर आई थी। वहीं दूसरी तरफ, चीन में भी 546 लोग लापता हैं, जिनमें 261 विदेशी शामिल हैं। राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों ने अब तक कुल 11,814 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है, जिसमें अकेले सुरक्षा बलों ने 6,541 लोगों की जान बचाई है। इसके अलावा, विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब तक 324 विदेशी नागरिकों को भी सुरक्षित बचा लिया गया है।
हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
वर्तमान समय में राहत टीमों का पूरा ध्यान हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट की सुरंगों पर है, जहां सैकड़ों श्रमिकों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। नेपाल बिजली प्राधिकरण के अम्शु किरण शाही ने बताया कि रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्लांट की एक सुरंग के अंदर बने कमरे जैसे ढांचे में लगभग 46 मजदूरों के जीवित होने की बहुत मजबूत संभावना है। इस आपदा की वजह से देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 10 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है, जिसमें 8 चालू और 4 निर्माणधीन पनबिजली परियोजनाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। सड़क और संपर्क मार्ग की बात करें तो कुल 31 मोटर योग्य पुल और लगभग 50 सस्पेंशन ब्रिज टूट चुके हैं, जबकि पूरे इलाके में करीब 22 लाख टन मलबा इकट्ठा हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय मदद और सुरक्षा बलों की तैनाती
मुश्किल समय में नेपाल की मदद के लिए दुनिया के कई देश आगे आए हैं और भारत, चीन तथा अमेरिका की विशेष टीमें सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार काम कर रही हैं। अमेरिका ने अपनी हाई-टेक जीवन-तलाश तकनीक के साथ एक संकट प्रतिक्रिया टीम को मैदान में उतारा है, और दक्षिण कोरिया ने भी अपनी 44 सदस्यों की एक आपातकालीन राहत टीम भेजी है। चीन ने राहत कार्यों के लिए ड्रोन, डीएनए टेस्टिंग मशीनें और तकनीकी विशेषज्ञता मुहैया कराई है, जबकि भारत ने अपनी 19 सदस्यीय फोरेंसिक और सुरंग बचाव टीम को नेपाल भेजा है। देश के प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 9,200 से ज्यादा सेना के जवान और 21,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और महिलाओं के लिए सहायता
संयुक्त राष्ट्र भी इस आपदा पर लगातार नजर बनाए हुए है, और OCHA के प्रवक्ता जेन्स लार्क ने मंगलवार देर रात तक 4,247 लोगों के लापता होने की पुष्टि करते हुए भूस्खलन और बंद पड़े जलमार्गों से जुड़े खतरों के प्रति आगाह किया है। UN वीमेंस की क्षेत्रीय निदेशक क्रिस्टीन अरब ने बताया कि लगभग 43,000 महिलाओं और लड़कियों को तुरंत सहायता की जरूरत है, और संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने भीड़भाड़ वाले राहत शिविरों में जनता के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई है। नुवाकोट और रासुवा जिलों के कुल 27 विस्थापन शिविरों में लगभग 3,500 लोग वर्तमान में रहने को मजबूर हैं। प्रधानमंत्री शाह ने यह संकेत दिया है कि सरकार अब खोज और बचाव अभियानों से अपना ध्यान हटाकर पुनर्वास और पुनर्निर्माण की तरफ लगा रही है, जिसमें मानसिक परामर्श और चिकित्सा देखभाल जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी।