नेपाल में भारी बाढ़ और भूस्खलन से टूरिज्म को बड़ा झटका, दस लाख लोगों की आजीविका खतरे में.

Praggya Singh sabal28 September 20263 min read3 viewsWorld
नेपाल में भारी बाढ़ और भूस्खलन से टूरिज्म को बड़ा झटका, दस लाख लोगों की आजीविका खतरे में.

नेपाल में प्राकृतिक आपदा का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है और उत्तर भारत से सटे इस पड़ोसी देश में बाढ़ तथा भूस्खलन की वजह से हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं। 28 सितंबर 2026 तक मिले आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल में टूरिज्म सेक्टर से जुड़े लगभग एक मिलियन (दस लाख) लोगों की आजीविका पर बड़ा संकट आ गया है। इस आपदा में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 11 लोग लापता हैं। इसके अलावा प्रशासन ने बताया कि 5,285 लोग ऐसे हैं जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है और 1,100 से अधिक लोग राहत शिविरों यानी टेंटों में रहने को मजबूर हैं।

प्रशासन और सरकार की चेतावनी

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA ने देश के कुल 77 जिलों में से 49 जिलों के लिए फ्लैश फ्लड यानी अचानक आने वाली बाढ़ की कड़ी चेतावनी जारी की है। एजेंसी की प्रवक्ता शांति महत ने विशेष तौर पर रसुवा और नुवाकोट जिलों का नाम लेते हुए कहा है कि वहां के लोगों को बहुत ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि पहले भी वहां खतरनाक घटनाएं हो चुकी हैं। इसके अलावा 24 सितंबर से शुरू हुई लगातार भारी बारिश के कारण नए सिरे से भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं।

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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 27 सितंबर तक कई इजरायली सैलानी समगांव इलाके में फंसे होने की खबर आई थी। नेपाल के गृह मंत्रालय की तरफ से ज्वाइंट सेक्रेटरी आनंद काफ्ले ने 23 सितंबर को ही देश के नागरिकों और पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी की थी कि कोई भी व्यक्ति आपदा संभावित इलाकों की तरफ गैर-जरूरी यात्रा करने से बचे। इस पूरी स्थिति की आधिकारिक जानकारी आप नेपाल सरकार के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं, जहां समय-समय पर अपडेट दिए जा रहे हैं।

बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान और अंतरराष्ट्रीय मदद

बाढ़ और कटान की वजह से नेपाल का इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह तबाह हो चुका है। कालीगंडकी कॉरिडोर के बेनी-जोमसोम-कोराला हिस्से में एक पक्का पुल पूरी तरह बह गया है और सड़क मार्ग कटने की वजह से कोराला बॉर्डर तक पहुंचना बंद हो गया है। इसके अलावा मनांग, मुस्तांग, म्याग्दी और बागलुंग जिलों में बिजली की सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ी है जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद नेपाल टूरिज्म बोर्ड देश में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए 'नेपाल कॉलिंग' नाम से एक अभियान चला रहा है और उनका कहना है कि कई पर्यटन स्थल अभी भी पूरी तरह सुरक्षित और घूमने के लायक हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नेपाल के हालात पर चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने 24 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA की बैठक में हिस्सा लिया और दुनिया से अपील की कि नेपाल को जलवायु न्याय मिलना चाहिए और देश की रिकवरी के लिए ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मदद दी जानी चाहिए। नेपाल की इस अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका ने मदद का हाथ बढ़ाया है और नए पक्के पुल बनाने, पीने के पानी की व्यवस्था सुधारने, साफ-सफाई के कामों के लिए फंड देने और आपातकालीन राहत कार्यों में ड्रोन की मदद देने का वादा किया है।

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