नेपाल में जलवायु आपदा से भारी तबाही, विदेश मंत्री बोले- पुनर्निर्माण के लिए चाहिए 5 अरब डॉलर

जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे नेपाल ने अब दुनिया भर के देशों से मदद की गुहार लगाई है। नेपाल के विदेशमंत्री शिशिर खनाल ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित जी-7 विकास मंत्रीस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया और देश में आए भारी संकट के बारे में खुलकर बात रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं से निपटने और लोगों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए लंबे समय तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बेहद जरूरत है।
पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर से अधिक की भारी रकम जरूरी
विदेश मंत्री ने बैठक के दौरान बताया कि हाल ही में आई जलवायुजनित आपदा की वजह से देश में बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान हुआ है। लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ की वजह से आम लोगों के घर, पक्की सड़कें, बड़े पुल, स्कूल, अस्पताल और जलविद्युत से जुड़े बुनियादी ढांचे पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। इन सब चीजों के नष्ट होने से आम जनता का रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और जरूरी सेवाएं भी ठप पड़ गई हैं। सरकार की तरफ से जो शुरुआती आकलन सामने आया है, उसके मुताबिक देश में पुनर्वास और पुनर्निर्माण के कामों को पूरा करने के लिए 5 अरब अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा की राशि की आवश्यकता होगी। इस आपदा के वैज्ञानिक कारणों का पता लगाने के लिए सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन भी किया है जो इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर का खतरा नहीं बल्कि वर्तमान हकीकत है
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य में आने वाला कोई संकट नहीं बचा है, बल्कि यह हमारे देश की आज की कड़वी सच्चाई बन चुका है। इसके असर की रफ्तार और तीव्रता लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल ग्रीनहाउस गैस के कुल उत्सर्जन में नेपाल का हिस्सा न के बराबर है, फिर भी देश को इसके सबसे बुरे और असमान प्रभावों का सामना अकेले ही करना पड़ रहा है। विनाशकारी बाढ़, पहाड़ दरकना और हिले हुए ग्लेशियरों का पिघलना आज आम बात बन गई है जिससे देश के लंबे प्रयासों से हासिल की गई विकास की सभी उपलब्धियां खतरे में पड़ गई हैं।
नेपाल की पांच प्रमुख उम्मीदें और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पांच मुख्य अपेक्षाएं रखी हैं। सबसे पहले देश में आपदा पीड़ितों के लंबे समय तक चलने वाले पुनर्वास के लिए अनुदान और आसान शर्तों वाले वित्तीय संसाधनों की मांग की गई है। दूसरी बड़ी प्राथमिकता यह है कि विकासशील देशों को जलवायु वित्त और नुकसान की भरपाई के लिए मिलने वाला पैसा बिना किसी कागजी अड़चन के बहुत ही आसान और तेज तरीके से मिलना चाहिए। इसके अलावा नेपाल ने आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक मजबूत करने तथा इसमें भारी निवेश बढ़ाने की अपील की है ताकि आने वाले खतरों से समय रहते निपटा जा सके।
विदेश मंत्री ने यह भी जोर देकर कहा कि हिमालयी क्षेत्र में तेजी से आ रहे बदलावों का असर केवल नेपाल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव दक्षिण एशिया और पूरी दुनिया के मानसून चक्र तथा करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है। उन्होंने भोटेकोशी में आई आपदा को केवल एक स्थानीय त्रासदी मानने से इनकार करते हुए इसे पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से मिलकर काम करने का आह्वान किया।