नेपाल में भीषण आपदा, ग्लेशियर फटने से 626 लोगों की मौत, सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए मांगी मदद.

Nura Basta29 August 20263 min read17 viewsWorld
नेपाल में भीषण आपदा, ग्लेशियर फटने से 626 लोगों की मौत, सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए मांगी मदद.

नेपाल देश में एक बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा आ गई है, जिससे चारों तरफ तबाही मच गई है। 26 अगस्त 2026 को बुधवार के दिन एक बड़े ग्लेशियर के फटने की वजह से देश में भयंकर बाढ़ आ गई और लोगों का बहुत नुकसान हुआ। अमेरिकी एजेंसी USGS ने साफ किया कि यह हादसा ग्लेशियर के नीचे चट्टान टूटने के कारण हुआ था, जिससे भारी मलबा नीचे आ गिरा। इस खतरनाक हादसे के बाद से नेपाल सरकार लगातार राहत और बचाव के काम में जुटी हुई है और अब दूसरे देशों से भी मदद मांगी जा रही है।

बढ़ता जा रहा है मरने वालों और लापता लोगों का आंकड़ा

तारीख 29 अगस्त 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में इस हादसे की वजह से मरने वालों की संख्या बढ़कर 626 हो चुकी है। इसके अलावा, करीब 1,924 से 2,426 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश लगातार की जा रही है। इन लापता लोगों में 31 अलग-अलग देशों के 517 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। पड़ोसी देश तिब्बत और चीन के अधिकारियों ने भी यह जानकारी दी है कि उनके इलाके में कम से कम 7 लोगों की जान चली गई है और 554 से 558 लोग लापता हैं।

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दूसरे देशों से मदद लेने का हुआ बड़ा फैसला

शुरुआत में नेपाल सरकार ने विदेशी मदद लेने से मना कर दिया था, लेकिन हालात बहुत ज्यादा खराब होने और भारी दबाव के बाद सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने 29 अगस्त को यह ऐलान किया कि उनका देश अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया से खास तकनीकी मदद ले रहा है। यह मदद मुख्य रूप से सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालने, डीएनए टेस्ट और फॉरेंसिक जांच के लिए ली जा रही है। इन देशों की विशेष टीमों के शनिवार के अंत तक नेपाल पहुंचने की उम्मीद है। काठमांडू से अल जजीरा की रिपोर्टर मिनेल फर्नांडिज़ ने बताया कि इस तरह की लक्षित मदद लेने का फैसला इसलिए किया गया ताकि बचाव के काम में आ रही कमियों को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके।

सुरक्षा बलों का अभियान और सुरंगों में फंसे लोग

नेपाल सरकार ने देश भर में सुरक्षा के लिए 15,000 से ज्यादा जवानों को तैनात कर दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, नेपाल में अब तक 3,700 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। बाढ़ वाले इलाकों से कुल मिलाकर 4,451 लोगों की जान बचाई जा चुकी है, जिनमें जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से निकाले गए 191 लोग भी शामिल हैं। हालांकि, अभी भी 100 से ज्यादा लोग जमीन के अंदर बनी सुरंगों और संरचनाओं में फंसे हुए हैं। नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत ने बताया कि त्रिशूल 3ए परियोजना की सुरंग तक पहुंचने में बहुत दिक्कत आ रही है क्योंकि वहां बहुत ज्यादा कीचड़ जमा है और मौसम भी बहुत खराब है। खराब मौसम की वजह से शनिवार को हेलीकॉप्टर से होने वाले बचाव कार्यों को कुछ समय के लिए रोकना भी पड़ा था।

जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान

रसुवा और नुवाकोट जिलों में कम से कम 14 जलविद्युत परियोजनाओं को इस आपदा में भारी नुकसान पहुंचा है। इन क्षतिग्रस्त प्रोजेक्ट्स में अपर त्रिशuli-1, त्रिशूल 3A, त्रिशूल-3B, रसुवागढी, माइलुंग खोला और लांगटांग खोला शामिल हैं। बचाव के काम में सबसे बड़ी रुकावट यह आ रही है कि ऊपर की तरफ मलबे के कारण पानी रुकने से एक नई और खतरनाक झील बन गई है, जिससे दोबारा बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। इस खतरे की वजह से कुछ देर के लिए बचाव कार्य रोकने भी पड़े थे, लेकिन बाद में स्थिति को काबू में मानते हुए काम फिर से शुरू कर दिया गया। इस आपदा के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप Al Jazeera की वेबसाइट पर भी जा सकते हैं।

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