नेपाल में भयानक ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, 239 लोग हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकाले गए.

नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आए भयानक प्राकृतिक संकट के बाद राहत और बचाव का काम बहुत तेजी से चल रहा है। 26 अगस्त 2026 को हुई इस बड़ी घटना में ग्लेशियर टूटने की वजह से अचानक भयंकर बाढ़ आ गई थी, जिसने चारों तरफ तबाही मचा दी। इस आपदा के बाद नेपाल सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। कोलकाता में नेपाल के डिप्टी कंसुल जनरल दीपेश लेखक ने जानकारी दी है कि देश की सभी सरकारी एजेंसियां, सेना, पुलिस और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मिलकर खोज अभियान को सबसे ऊपर रखा है, जिसके तहत अभी तक कुल 239 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इस बारे में अधिक जानकारी आप ANI News पर देख सकते हैं।
आपदा का कारण और बड़ा नुकसान
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक यह घटना किसी भूकंप की वजह से नहीं हुई थी, बल्कि यह 5.2 तीव्रता का एक बड़ा ग्लेशियर टूटने का मामला था। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से बहुत भारी नुकसान हुआ है और हर तरफ बर्बादी के निशान दिख रहे हैं। 27 अगस्त 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में कम से कम 165 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा नेपाल और तिब्बत के अलग-अलग इलाकों में 1,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में बचाव दल दिन-रात जुटे हुए हैं। नेपाल की आधिकारिक आपदा एजेंसी के डेटा के मुताबिक अकेले नेपाल में 823 से 826 लोग लापता हैं, जिनमें 579 पर्यटक भी शामिल हैं। वहीं चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार तिब्बत में 558 लोग लापता हैं और इनमें से 260 लोग विदेशी नागरिक हैं।
बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान और अंतरराष्ट्रीय मदद
इस आपदा की वजह से इलाके का सड़क और बिजली का ढांचा बुरी तरह तहस-नहस हो गया है। लगभग 42 किलोमीटर लंबी बेत्रावती-रसुवागढ़ी सड़क को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है और इसके अलावा कम से कम 14 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी इसकी चपेट में आ गए हैं। इस मुश्किल समय में नेपाल के प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने देशवासियों से एकता बनाए रखने की अपील की है और सरकार की तरफ से प्रभावित लोगों को रहने के लिए छत और सही मेडिकल सुविधा देने का पूरा वादा किया है। इस बड़ी आपदा से निपटने के लिए दूसरे देशों और संगठनों से भी मदद पहुंच रही है। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी तरफ से सहायता की पेशकश की है, जबकि अमेरिका सरकार ने आपातकालीन राहत के तौर पर 500,000 डॉलर देने का ऐलान किया है। इसके अलावा भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों ने भी राहत सामग्री और संसाधन भेजकर मदद पहुंचाई है। अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती टूटी हुई साफ-सफाई व्यवस्था के कारण फैलने वाली बीमारियों को रोकना है, जबकि लापता बताए जा रहे 644 यात्रियों की असली पहचान की पुष्टि करने का काम भी लगातार जारी है।