नेपाल में ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, बाढ़ और लैंडस्लाइड से मरने वालों की संख्या 1,200 के पार.

Praggya Singh sabal3 September 20263 min read30 viewsWorld
नेपाल में ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, बाढ़ और लैंडस्लाइड से मरने वालों की संख्या 1,200 के पार.

नेपाल और चीन की सीमा पर एक बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा आ गई है, जहां ग्लेशियर टूटने की वजह से अचानक भयानक बाढ़ आ गई है। इस आपदा ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है और आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस भयंकर घटना में अब तक 1,259 लोगों की जान जा चुकी है। यह दर्दनाक हादसा 26 अगस्त 2026 को हुआ था, जब अचानक आए पानी के सैलाब ने रास्ते में आने वाली हर चीज़ को अपने साथ बहा दिया। नेपाल के तिमुरे शहर में इस बाढ़ का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है, जहां मकान और दुकानें पूरी तरह नेस्तनाबूद हो गए हैं।

लापता लोगों की तलाश और राहत बचाव कार्य

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA और नेपाल पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस आपदा में 5,083 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इन लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनकी तलाश लगातार की जा रही है। पड़ोसी देश चीन के तिब्बत हिस्से में भी इस आपदा का असर दिखा है, जहां सरकारी मीडिया के अनुसार 21 लोगों की मौत हुई है और 541 लोग लापता हैं। यह पानी का तेज बहाव भोते कोशी नदी के जरिए नीचे आया था, जिससे मुख्य तौर पर रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए नेपाल आर्मी ने अपने 9,300 से ज्यादा जवानों को मैदान में उतारा है, जो फंसे हुए लोगों को निकालने और शवों को संभालने का काम कर रहे हैं।

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डीएनए टेस्ट और अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार

सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों जैसे कि तिमुरे से जो शव बरामद किए गए हैं, उनकी हालत बहुत खराब और क्षत-विक्षत है। इस वजह से अधिकारियों के लिए शवों की पहचान करना बहुत मुश्किल हो गया है। पहचान के लिए फोरेंसिक टीमें अब डीएनए टेस्ट का सहारा ले रही हैं। अपनों की तलाश में सैकड़ों रिश्तेदार नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचे हैं ताकि वे अपने गायब परिजनों के लिए डीएनए सैंपल दे सकें। इस मुश्किल समय में तमिलनाडु सरकार ने भी आगे आकर अपने उन नागरिकों के लिए मुफ्त डीएनए टेस्ट की व्यवस्था की है जिनके परिवार के सदस्य इस आपदा में लापता हो गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल छेत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तकनीकी मदद मांगी है। सरकार ने ड्रोन, रिमोट सेंसिंग तकनीक और आपदा पीड़ितों की पहचान में मदद के लिए ग्लोबल सपोर्ट की अपील की है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप नेपाल विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

घर और बुनियादी ढांचे का भारी नुकसान

सरकारी अधिकारियों और NDRRMA प्रमुख धर्म राज उप्रेती के अनुमान के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में लगभग 7,500 घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। सरकार अब सुरक्षित स्थानों पर करीब 20,000 नए घरों को फिर से बनाने की योजना बना रही है ताकि विस्थापित लोगों को बसाया जा सके। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि हिमालय क्षेत्र के गर्म होने का सबसे बड़ा खामियाजा नेपाल को उठाना पड़ रहा है, जबकि इसमें देश का योगदान न के बराबर है। इस दुखद घड़ी में प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह की कैबिनेट ने 7 सितंबर को राष्ट्रीय शोक के रूप में मनाने का फैसला किया है, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट PNA रिपोर्ट्स में भी साझा की गई है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनिसेफ ने बताया है कि इस समय लगभग 22,000 बच्चों को तुरंत साफ पानी, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सहायता की सख्त जरूरत है। देश-विदेश के कई राहत संगठन जैसे कि IFRC और पीपल इन नीड लगातार प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इस आपदा से जुड़ी पल-पल की अपडेट के लिए ReliefWeb की स्थिति रिपोर्ट को देखा जा सकता है।

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