नेपाल में बर्फीले तूफान और बाढ़ से मचा हाहाकार, 1100 से ज्यादा लोगों की मौत और हजारों लोग लापता.

Nura Basta2 September 20262 min read26 viewsWorld
नेपाल में बर्फीले तूफान और बाढ़ से मचा हाहाकार, 1100 से ज्यादा लोगों की मौत और हजारों लोग लापता.

नेपाल के रसुवा जिले में इन दिनों बचाव अभियान तेजी से चल रहा है और रेस्क्यू टीमें गहरे कीचड़ से शवों को बाहर निकाल रही हैं। यह भयानक आपदा पिछले हफ्ते 26 अगस्त 2026 को आई थी, जब नेपाल में एक विनाशकारी ग्लेशियर बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया था। अलजजीरा की रिपोर्टर जेसिका वाशिंगटन के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास इस आपदा में मरने वालों की संख्या को संभालने के लिए फोरेंसिक टीमें लगातार काम कर रही हैं।

आधिकारिक आंकड़े और लापता लोगों की तलाश

2 सितंबर 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नेपाल में कम से कम 1,114 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं दूसरी ओर, चीन के अधिकारियों ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 16 लोगों के मारे जाने की बात कही है। नेपाल में अभी भी 3,900 से 4,462 लोग लापता हैं और चीन में 546 लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल के नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (NEOC) के वरिष्ठ अधिकारी फणींद्र पौडेल ने बताया कि अब जीवित बचे लोगों को खोजने की उम्मीद बहुत कम होती जा रही है।

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आपदा का कारण और अंतरराष्ट्रीय मदद

यह भयानक आपदा हिमालय में माउंट लंगटांग लिरुंग की बर्फ और चट्टानों के एक बड़े हिस्से के टूटने से आई थी। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इस घटना के लिए लंबे समय से बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार बताया है। नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल (प्रचंड) ने संकेत दिया है कि सरकार अब खोज और बचाव कार्य से आगे बढ़कर पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर ध्यान दे रही है। इसके बावजूद भारत, चीन और अमेरिका से विशेष टीमें अभी भी सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। ये टीमें हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरंगों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके खोजबीन कर रही हैं, जहां 639 लोग फंसे हुए थे और अब तक 279 लोगों को उन जगहों से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।

प्रभावित क्षेत्र और स्वास्थ्य संबंधी कदम

इस आपदा का सबसे बुरा असर नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन जिलों के साथ-साथ तिब्बत के ग्यािरोंग काउंटी पर पड़ा है। चितवन में शवों के जल्दी सड़ने और मुर्दाघरों में जगह कम होने के कारण अधिकारियों ने अज्ञात शवों को दफनाना शुरू कर दिया है। सरकार ने बीमारियों की रोकथाम के लिए निगरानी भी बढ़ा दी है। सेव द चिल्ड्रन संस्था ने नुवाकोट में बचे हुए बच्चों के मानसिक तनाव को लेकर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र, यूएनडीपी, यूएन वुमन और आईएफआरसी जैसे कई अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार राहत सामग्री पहुंचाने और समन्वय बनाने में लगे हुए हैं। विशेषज्ञ दानिश मुस्तफा जैसे लोगों ने इस आपदा को हिमालयी क्षेत्रों में बेहतर निगरानी और निकासी के नियमों को सुधारने के लिए एक बड़ी चेतावनी बताया है।

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