Nepal Flood: नेपाल में ग्लेशियर टूटने से बड़ी तबाही, 900 से ज्यादा मजदूर सुरंगों में फंसे.

नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी कि लगभग छह हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की साइट्स पर कम से कम 933 मजदूर फंसे हुए हैं। नेपाल-चीन सीमा के पास एक ग्लेशियर के टूटने की वजह से बुधवार, 26 अगस्त 2026 की सुबह भयंकर बाढ़ आ गई थी, जिसके कारण यह गंभीर स्थिति पैदा हुई है। इस आपदा ने पर्वतीय इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
फंसे हुए मजदूरों और लापता लोगों का आंकड़ा
स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संघ (IPPAN) के अनुसार, रसुवा और नुवाकोट जिलों में स्थित नौ प्रोजेक्ट्स से 537 कर्मचारी और मजदूर अभी भी लापता हैं। शुरुआती दौर में कुल 898 लोग लापता बताए गए थे, जिनमें से 361 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। बचाव अभियान अब अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। 216 मेगावाट क्षमता वाला अपर त्रिशुली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट इस समय सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि अकेले इसी प्रोजेक्ट के अंदर करीब 300 लोग फंसे होने की आशंका है। इसके अलावा 60 मेगावाट का अपर त्रिशुली-3ए, अपर त्रिशुली-3बी और 22 मेगावाट का चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
ड्रिलिंग और सेना की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय ने रविवार, 30 अगस्त को यह जानकारी दी कि ड्रिलिंग के काम में थोड़ी सफलता मिली है। राहत दलों ने सुरंग प्रणालियों के अंदर ऑक्सीजन पहुंचाने और कैमरे से स्थिति देखने के लिए चार जगहों पर छेद किए हैं। नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने बताया कि बचाव टीमों के अंदर जाने का रास्ता बनाने के लिए खुदाई का काम तेजी से चल रहा है। इस काम में नेपाली सेना पूरी तरह जुटी हुई है और उसने भारी मशीनों जैसे कि एक्कावेटर और बुलडोजर को हेलीकॉप्टर के जरिए उन जगहों पर पहुंचाया है जहां रास्ता पूरी तरह कट चुका है। अपर त्रिशुली-3ए तक जाने वाली सड़कें पूरी तरह से बंद हैं, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भारी दिक्कत आ रही है।
बिजली उत्पादन ठप और भारी जानमाल का नुकसान
नेपाल बिजली प्राधिकरण के मुताबिक, 11 हाइड्रोपावर स्टेशन और एक सोलर प्लांट का संचालन पूरी तरह बंद हो चुका है। इनकी कुल क्षमता 431.1 मेगावाट है, जो देश की कुल बिजली क्षमता का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा, 470 मेगावाट क्षमता वाले 15 नए प्रोजेक्ट्स को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इस आपदा और उसके बाद आए मलबे के कारण रविवार तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 810 हो गई है, जिसमें नेपाल में 794 मौतें और तिब्बत में 16 मौतें शामिल हैं। इसके साथ ही, अभी भी 3,048 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।
अंतरराष्ट्रीय मदद और जलवायु परिवर्तन की चेतावनी
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने विशेष रूप से भारी वजन उठाने वाले ड्रोन, आधुनिक लोकेशन टेक्नोलॉजी, फॉरेंसिक किट और फ्रीजर यूनिट भेजने का आग्रह किया है। भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेष सुरंग-बचाव टीमें इस समय नेपाल के स्थानीय लोगों की मदद कर रही हैं। अकेले भारत की तरफ से 68.5 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टिल ने इस आपदा को पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र की कमजोरी की एक गंभीर चेतावनी बताया है। वहीं, स्थानीय प्रशासन ने भोटेकोशी और त्रिशुली नदियों में बढ़ते जलस्तर को लेकर चेतावनी जारी की है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।