नेपाल में बड़ा खतरा टालने की तैयारी, खतरनाक हिमतालों का जलस्तर घटाने के लिए बनेगी योजना.

नेपाल के पहाड़ों पर मंडरा रहे बड़े खतरे को टालने के लिए सरकार ने अब कमर कस ली है और कई खतरनाक हिमतालों का जलस्तर कम करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। देश के ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान इस बात की पूरी जानकारी साझा की है। सरकार का यह कदम संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
वैज्ञानिक तरीकों से कम होगा पानी का स्तर
मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने रविवार को पत्रकारों को बताया कि आपदा के खतरे को कम करने के लिए मंत्रालय ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार की योजना हिमतालों के पानी को वैज्ञानिक तरीकों से बाहर निकालने की है ताकि किसी भी संभावित बड़े खतरे को समय रहते टाला जा सके। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते इन झीलों के जलस्तर को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भारी तबाही का कारण बन सकता है। इसके अलावा कुछ अत्यधिक संवेदनशील हिमतालों में ब्लास्टिंग यानी नियंत्रित धमाकों के जरिए पानी का स्तर घटाने के विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की टीम तैयार कर रही है रिपोर्ट
सरकार पूरी तरह से सतर्क होकर काम कर रही है और बिना किसी जल्दबाजी के पुख्ता रणनीति बनाई जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी तैयारियां पूरी होने के बाद ही आखिरी फैसला लिया जाएगा कि किस क्षेत्र में किस तरह की कार्रवाई करनी है। हालांकि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि किन-किन खास हिमतालों का पानी सबसे पहले घटाया जाएगा क्योंकि इस मामले में देश-विदेश के विशेषज्ञों से लगातार परामर्श लिया जा रहा है। विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण हिमतालों के नाम सरकार को सुझाए हैं और उन्हीं की वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर आगे का कदम उठाया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय फंड और स्थानीय निकायों का मिलेगा साथ
इस बड़े अभियान को पूरा करने के लिए वित्तीय मदद ग्रीन क्लाइमेट फंड के जरिए प्राप्त होगी। इस मिलने वाले सहयोग का सही उपयोग करते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नेपाल में कुल 21 हिमताल ऐसे हैं जिन्हें विशेषज्ञों ने जोखिमयुक्त माना है। इन सभी में से कोशी और गंडकी क्षेत्रों में स्थित चार हिमताल ऐसे हैं जिन्हें सबसे ज्यादा खतरनाक यानी अति उच्च जोखिम वाला माना गया है। सरकार की कोशिश है कि इसी साल से इन खतरनाक जगहों पर काम शुरू कर दिया जाए ताकि आने वाले समय में किसी भी बड़ी अनहोनी से बचा जा सके।