नेपाल में बड़ा ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके और बाढ़ से 1400 लोगों की मौत.

Sushma Kumari9 September 20263 min read26 viewsWorld
नेपाल में बड़ा ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके और बाढ़ से 1400 लोगों की मौत.

नेपाल के लैंगटांग नेशनल पार्क में एक बड़ी प्राकृतिक आपदा आई है, जहां Langtang Lirung में एक भारी ग्लेशियर अचानक टूट गया। यह घटना 26 August 2026 को सुबह 8:37 AM स्थानीय समय पर हुई। इस भयंकर तबाही के कारण लाखों क्यूबिक मीटर मलबे और बर्फ का पहाड़ एक किलोमीटर से ज्यादा नीचे आ गिरा। इस बड़ी घटना की वजह से एक जोरदार तेज धमाका और तेज मलबा बहाव शुरू हो गया, जिससे ज़मीन हिलने लगी। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने पुष्टि की कि इस मलबे के गिरने से 5.2 magnitude का भूकंप जैसा तेज कंपन दर्ज किया गया। शुरुआत में नेपाल के विदेश मंत्री Shisir Khanal ने इसे सामान्य भूकंप बताया था, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने साफ किया कि यह कंपन ग्लेशियर के टूटने की वजह से ही पैदा हुआ था।

वैज्ञानिकों का अनुमान और मौसम का असर

वैज्ञानिकों का ऐसा अनुमान है कि इस बड़े हिमस्खलन की वजह से करीब 200 million cubic metres मलबा अपनी जगह से हिल गया। यह इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी रॉक-आइस यानी चट्टान और बर्फ की घटना मानी जा रही है। शुरुआती सैटेलाइट जांच में यह बात सामने आई कि इस घटना से ठीक एक हफ्ते पहले वहां का मौसम बहुत ज्यादा गर्म था, जिसकी वजह से ग्लेशियर में लगातार कमजोरी आ रही थी। चीन के राष्ट्रीय जलवायु केंद्र के उप निदेशक Gao Rong ने जानकारी दी कि तिब्बती पठार पर ग्लेशियर का इलाका पिछले 60 years में लगभग 24% तक कम हो गया है। इसके अलावा करीब 7,000 छोटे ग्लेशियर पूरी तरह से गायब हो चुके हैं, जिससे इस तरह की खतरनाक घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।

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जान-माल का भारी नुकसान और प्रभावित इलाके

इस भयानक आपदा की वजह से चीन-नेपाल बॉर्डर पर स्थित Gyirong Port पूरी तरह तबाह हो गया है और इसके आसपास के कई गांव भी मलबे में दब गए। September 8, 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में मरने वालों की संख्या लगभग 1,400 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा 5,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं जिनकी तलाश की जा रही है। नेपाल के कई जिले जैसे Rasuwa, Nuwakot, Dhading, Gorkha और Chitwan इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। शुरुआती आकलन के अनुसार इस आपदा में लगभग $2.56 billion यानी भारी भरकम रकम का नुकसान हुआ है। त्रिशूल नदी के पास बने कई जलविद्युत यानी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जिससे वहां काम करने वाले सैकड़ों मजदूर भी लापता बताए जा रहे हैं।

राहत और बचाव कार्य

प्रभावित लोगों की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र यानी United Nations और उसके सहयोगियों ने मिलकर September 4, 2026 को $49.6 million का एक फ्लैश अपील फंड जारी किया है। इस फंड का इस्तेमाल 19,284 परिवारों के 84,000 से ज्यादा लोगों की मदद के लिए किया जा रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने काठमांडू में आपातकालीन राहत सामग्री पहुंचने की पुष्टि की है। इसके अलावा डीएनए पहचान के विशेषज्ञ भी वहां पहुंचे हैं ताकि शवों की पहचान करके उनका सामूहिक अंतिम संस्कार किया जा सके क्योंकि वहां शवगृह यानी morgue की भारी कमी है। चीनी प्रशासन ने कड़ी मेहनत के बाद September 3, 2026 तक Gyirong Port जाने वाले रास्ते को मलबे से पूरी तरह साफ कर दिया था।

भविष्य के लिए चेतावनी और सुधार की जरूरत

अल जज़ीरा के पत्रकार Daniel McKerrell लगातार इस पूरे मामले की रिपोर्टिंग कर रहे हैं। इस घटना ने नेपाल की आपदा चेतावनी प्रणालियों में मौजूद कमियों को पूरी तरह उजागर कर दिया है। अब तमाम विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की लगातार होने वाली आपदाओं से निपटने के लिए अपनी रणनीति में तुरंत बदलाव करना चाहिए। मौजूदा समय में नेपाल में लगभग 20,000 घरों को फिर से बनाने की सख्त जरूरत है ताकि लोगों को रहने के लिए सुरक्षित जगह मिल सके।

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