Nepal Flood News: नेपाल में ग्लेशियर टूटने से भीषण तबाही, 900 से ज्यादा लोगों की मौत और हजारों लापता.

Nura Basta1 September 20263 min read12 viewsWorld
Nepal Flood News: नेपाल में ग्लेशियर टूटने से भीषण तबाही, 900 से ज्यादा लोगों की मौत और हजारों लापता.

नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में 26 अगस्त 2026 को माउंट लांगटांग लिरुंग पर ग्लेशियर फटने के बाद अचानक आई भयंकर बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से सैकड़ों लोगों की जान चली गई है और हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस संकट ने पूरे इलाके में मानवीय चुनौती खड़ी कर दी है, जिससे प्रभावित परिवारों का हाल बेहाल हो गया है। सरकारी और राहत एजेंसियों द्वारा लगातार बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं ताकि फंसे हुए लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके।

आधिकारिक आंकड़े और नुकसान की स्थिति

1 सितंबर 2026 तक सामने आए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अकेले नेपाल में 939 लोगों की मौत हो चुकी है और 3,925 लोग लापता हैं। इसके अलावा चीन के तिब्बत क्षेत्र में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। इस तरह कुल मिलाकर इस आपदा में कम से कम 955 लोगों की जान चली गई है और 4,471 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल छेत्री ने 31 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी कि सरकार ने आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय सहायता की मांग की है। सरकार ने डीएनए टेस्टिंग किट, लिडार तकनीक और विशेष ड्रोन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इस बारे में अधिक जानकारी आप PNA News की रिपोर्ट में देख सकते हैं।

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अमेरिका में रह रहे नेपाली परिवारों की चिंता

अमेरिका में रहने वाले नेपाली मूल के परिवारों में अपने रिश्तेदारों की खबर न मिलने के कारण भारी बेचैनी और तनाव का माहौल है। वर्जीनिया में रहने वाली मुक्ति पटेल अपने पांच परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रही हैं, जिनमें उनके पिता, बहन, बहन के पति और उनकी मां शामिल हैं जो एक धार्मिक यात्रा पर गए थे। वे 40 मेहमानों और सात गाइडों के एक टूर ग्रुप का हिस्सा थे और वे सभी फिलहाल लापता हैं। वर्जीनिया की ही एक अन्य निवासी स्नेह सुदीर भी अपने पति की तलाश में जुटी हैं जो हाइकर्स के एक अलग समूह के साथ गए थे और बाढ़ के बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, सीमावर्ती इलाके में शुरुआती दौर में लगभग 80 अमेरिकी नागरिक लापता बताए गए थे, जिनमें से 13 लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है।

राहत और बचाव कार्यों की मौजूदा स्थिति

संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार प्रभावित इलाकों में पहुंचना अभी भी सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है क्योंकि सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और नुवाकोट तक ही गाड़ियां जा पा रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने बताया कि 22,000 से अधिक बच्चों को सुरक्षा की जरूरत है और लगभग 107 बच्चे अपने परिवारों से बिछड़ गए हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) और नेपाल सेना मिलकर राहत अभियानों का संचालन कर रहे हैं। भारत, सिंगापुर, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देशों से अंतरराष्ट्रीय मदद पहुंच चुकी है। भारत की ओर से फॉरेंसिक टीमें भेजी गई हैं। मर्सी कॉर्प्स जैसे गैर-सरकारी संगठन प्रभावित परिवारों को भोजन और स्वच्छता किट बांट रहे हैं, जबकि डायरेक्ट रिलीफ संस्था माउंटेन हार्ट नेपाल के साथ मिलकर आपातकालीन मेडिकल सप्लाई जुटाने का काम कर रही है। प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने पर्यावरण में आए इस अभूतपूर्व बदलाव को देखते हुए तत्काल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु कार्रवाई की अपील की है। इस आपदा से रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, कावरे और काठमांडू घाटी जैसे जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इस बाढ़ से जुड़ी सैटेलाइट तस्वीरें और विवरण European Space Agency की वेबसाइट पर भी देखे जा सकते हैं।

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