नेपाल सरकार का बड़ा फैसला, जनकपुरधाम का जानकी मंदिर बना संरक्षित स्मारक क्षेत्र.

नेपाल सरकार ने धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले जनकपुरधाम के प्रसिद्ध जानकी मंदिर को आधिकारिक तौर पर संरक्षित स्मारक क्षेत्र घोषित कर दिया है। नेपाल सरकार का यह कदम देश की सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और अहम प्रयास माना जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य जानकी मंदिर को जल्द से जल्द यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराना है, जिसके लिए इस तरह के ऐतिहासिक क्षेत्रों को संरक्षित क्षेत्र का दर्जा देना सबसे पहली और जरूरी कानूनी प्रक्रिया होती है। इस संबंध में संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से आधिकारिक राजपत्र में विधिवत सूचना प्रकाशित कर दी गई है ताकि आम जनता और स्थानीय लोगों को इसकी पूरी जानकारी मिल सके।
प्राचीन स्मारक संरक्षण ऐन के तहत लिया गया निर्णय
मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, मंत्रिपरिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक में प्राचीन स्मारक संरक्षण ऐन, 2013 के तहत मंदिर के इस पूरे इलाके को संरक्षित स्मारक क्षेत्र के रूप में विकसित करने का फैसला लिया गया। जैसे ही किसी जगह को संरक्षित स्मारक क्षेत्र घोषित किया जाता है, उसके बाद उस खास दायरे के भीतर भवन निर्माण कार्य और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर कड़े नियम और निर्धारित मापदंड लागू हो जाते हैं। सरकार ने अपने चालू वित्त वर्ष के बजट में भी इस बात को विशेष रूप से शामिल किया है कि जानकी मंदिर को हर हाल में विश्व धरोहर सूची में जगह दिलाई जाए। मंत्रालय के सचिव मुकुंद प्रसाद निरौला ने मीडिया को बताया कि इस क्षेत्र की चारों दिशाओं की स्पष्ट सीमाएं तय कर दी गई हैं ताकि किसी भी तरह का संशय न रहे और नियमों का सख्ती के साथ पालन कराया जा सके।
तय की गई चारों दिशाओं की सीमाएं
प्रशासन की तरफ से जारी की गई नई गाइडलाइन के मुताबिक, मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा और संरक्षण के लिए चारों तरफ के रास्तों और चौराहों को सीमा के रूप में तय किया गया है। पूर्वी सीमा के अंतर्गत जनकपुर का भानु चौक, कदम चौक, जिला प्रशासन कार्यालय और मालपोत कार्यालय को कवर करते हुए दक्षिण दिशा की तरफ जाने वाली परिक्रमा पथ की सड़क को शामिल किया गया है। वहीं दूसरी तरफ, पश्चिमी सीमा में भमरापुरा चौक से पश्चिम की ओर बढ़ने वाली सड़क, याज्ञवल्क्य संस्कृत माध्यमिक विद्यालय, ज्ञानकूप और ऐतिहासिक हनुमान मंदिर को जोड़ते हुए उत्तर दिशा की तरफ जाने वाले परिक्रमा पथ को पूरी तरह से निर्धारित किया गया है।
उत्तरी सीमा के दायरे में हनुमान मंदिर, पिडारी चौक पर स्थित राजा जनक स्मारक, मधेस प्रदेश भवन और मिल्स एरिया से होते हुए सीधे भानु चौक तक जाने वाले परिक्रमा पथ की सड़क को रखा गया है। इसके अलावा दक्षिणी सीमा की बात करें तो इसमें जनकपुरधाम के मुरली चौक पर स्थित प्रसिद्ध विद्यापति स्मारक से लेकर भमरापुरा चौक तक जाने वाले परिक्रमा पथ की सड़क को शामिल किया गया है। इन सभी सीमाओं के भीतर अब सरकार के तय किए गए कड़े नियम लागू होंगे। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं, जहां इस खबर को विस्तार से प्रकाशित किया गया है।