नेपाल के हिमलूंग हिमाल में भीषण हिमस्खलन, 4 की मौत, 12 लापता

नेपाल के मनांग जिले में स्थित हिमलूंग हिमाल के बेस कैंप में आए एक बड़े हिमस्खलन के कारण चार पर्वतारोहण गाइडों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि बारह अन्य कर्मचारी अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। यह दुखद घटना रविवार सुबह, 27 सितंबर, 2026 को उस समय घटित हुई जब अभियान दल शरद ऋतु के चढ़ाई के मौसम के लिए पर्वतारोहण के रास्ते और आवश्यक सुविधाएं तैयार करने में जुटे हुए थे। यह भयावह हिमस्खलन इतना जोरदार था कि इसने सीधे एक टेंट को अपनी चपेट में ले लिया, जिसके भीतर नौ पर्वतारोही और तेरह सहायक कर्मचारी आराम कर रहे थे।
जिन दुर्भाग्यपूर्ण व्यक्तियों की मौत की पुष्टि हुई है, उनमें छेबी भोटे, पासांग भोटे, बीरेंद्र गुरुंग और घनश्याम राय जैसे अनुभवी गाइड शामिल हैं। घटना के तत्काल बाद रविवार को छेबी और पासांग भोटे के शव बरामद कर लिए गए थे, जबकि गुरुंग और राय के शवों का पता सोमवार को चला। सभी बरामद किए गए शवों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से पहले चामे अस्पताल से होते हुए अब काठमांडू स्थित त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग अस्पताल ले जाया जा रहा है, ताकि आगे की औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। लापता बारह व्यक्तियों में से अधिकांश रसोई कर्मचारी और गाइड हैं, जिनकी पहचान पासांग नूरी शेरपा, ऐश बहादुर गुरुंग, कीर्ते तामांग और लक्ष्मी बोहरा जैसे नामों से की गई है। इन सभी की तलाश जारी है और उनके परिवार चिंतित हैं।
इस बड़े पैमाने की आपदा के बाद, पर्यटन विभाग और सशस्त्र पुलिस बल के समन्वय में एक व्यापक बचाव अभियान तुरंत शुरू किया गया। सोमवार सुबह, एक चौदह सदस्यीय खोज दल को घटना स्थल पर तैनात किया गया। इस दल का नेतृत्व अभियान के आयोजक और एक अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय गाइड मिंगमा ग्यालजे शेरपा (मिंगमा जी) कर रहे हैं, जो अपने अनुभव के लिए जाने जाते हैं। इस दल को प्रभु हेलीकॉप्टर के माध्यम से घटनास्थल तक पहुंचाया गया, जिसमें वरिष्ठ कैप्टन पासांग नोरबू शेरपा ने अहम भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, कैलाश हेलीकॉप्टर ने भी बचाव प्रयासों में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की है। हालांकि, बचाव कार्य में कई गंभीर चुनौतियां आ रही हैं। पर्वतीय क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश, बर्फबारी और कठिन भूभाग बचाव दल के लिए रास्ता बनाने और लापता लोगों को ढूंढने में बड़ी बाधा डाल रहे हैं।
अधिकारियों ने पहले ही मौसम संबंधी चेतावनी जारी कर दी थी। गुरुवार, 24 सितंबर, 2026 को ही ऐसे खराब मौसम की आशंका जताई गई थी। इसी के मद्देनजर, मनांग के जिला प्रशासन कार्यालय ने 25 से 27 सितंबर तक उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्रेकिंग और अन्य पर्वतीय गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। पर्यटन विभाग ने भी सभी पर्वतारोहियों से बिगड़ते हालात को देखते हुए अपनी गतिविधियों को तुरंत निलंबित करने का आग्रह किया है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने यह भी बताया है कि यही मौसम प्रणाली, जिसके कारण हिमलूंग हिमाल में यह त्रासदी हुई, देश के विभिन्न अन्य हिस्सों में भी कहर बरपा रही है। गुरुवार से रविवार के बीच, इसी मौसम के कारण पूरे देश में 21 अन्य मौतें हुईं और पांच लोग लापता हो गए, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
मार्च 2026 में स्थापित वर्तमान नियमों के अनुसार, नेपाल में पर्वतारोहण अभियानों को पर्यटन विभाग द्वारा जारी सख्त परमिट के तहत संचालित करना अनिवार्य है। इसमें विशेष रूप से नार फू क्षेत्र के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट और अन्नपूर्णा संरक्षण क्षेत्र परमिट (ACAP) शामिल हैं। इन विनियमों में यह भी अनिवार्य किया गया है कि किसी भी पर्वतारोहण समूह में अधिकतम बारह व्यक्ति ही हो सकते हैं और सभी दलों को नेपाल पर्वतारोहण संघ (NMA) के साथ पंजीकृत एक सरदार द्वारा निर्देशित किया जाना आवश्यक है। पर्यटन विभाग के महानिदेशक राम कृष्ण लामिछाने ने यह स्पष्ट किया है कि सरकार वर्तमान में चल रहे खोज अभियानों और समग्र स्थिति पर करीब से नजर रख रही है। यह त्रासदी पर्वतारोहण सुरक्षा और मौसम चेतावनी प्रणालियों के महत्व को रेखांकित करती है।