नेपाल में बड़ा हादसा, हाइड्रोपावर सुरंग में फंसे सैकड़ों मजदूर, बचाव अभियान जारी

नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में ग्लेशियर टूटने से आए भयानक बाढ़ के बाद कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले सैकड़ों मजदूर सुरंगों के अंदर फंस गए हैं। इस आपदा के बाद राहत और बचाव दलों ने मलबे के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक बड़ा और जरूरी अभियान शुरू कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, 3 सितंबर 2026 तक देश भर में मरने वालों की संख्या बढ़कर लगभग 1,250 तक पहुंच गई है, जबकि 4,000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
सुरंगों के अंदर जीवन बचाने की जद्दोजहद
यह पूरा तलाशी अभियान मुख्य रूप से रसुवागढी, लांगटांग, चिलिमे, अपर त्रिशूल 1 और अपर त्रिशूल 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के पास केंद्रित किया गया है। 111 मेगावाट क्षमता वाले रसुवागढी प्लांट में बचाव कर्मियों ने सुरंग के अंदर 150 मीटर तक की गहराई तक पहुंच बना ली है, हालांकि रास्ते में पड़े बड़े-बड़े पत्थर बचाव कार्य में रुकावट पैदा कर रहे हैं। नेपाल बिजली प्राधिकरण के अंशु किरण शाही ने 2 सितंबर को यह जानकारी दी थी कि सुरंग के अंदर एक सुरक्षित कमरे जैसी संरचना में 46 कामगारों के जीवित बचे रहने की बहुत अधिक संभावना है, जहां खाने-पीने का जरूरी सामान भी मौजूद है। इसी तरह, अपर त्रिशूल 3ए साइट पर नेपाली सेना के जवानों समेत 93 लोगों की टीम तीन एक्सकेवेटर और एक बॉबकैट मशीन की मदद से मलबा हटाने के काम में जुटी हुई है। इसके अलावा, लांगटांग प्रोजेक्ट में 25 बचाव कर्मियों की एक संयुक्त टीम सुरंग के भीतर 150 मीटर की गहराई में काम कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय मदद और खराब मौसम से चुनौती
इस बड़े बचाव अभियान की कमान नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के हाथों में है, जिन्हें भारत, चीन, कोरिया और सिंगापुर से आए विशेष अंतरराष्ट्रीय दलों का पूरा समर्थन मिल रहा है। ये विदेशी साझेदार देश जीवन का पता लगाने वाली तकनीक और प्रीफैब्रिकेटेड पुल उपलब्ध कराने के लिए लगातार सहयोग कर रहे हैं। विभिन्न प्रोजेक्ट साइट्स से अब तक 279 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन 639 लोग अब भी लापता हैं जिनके सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। इस कठिन राहत कार्य में लगभग 22 लाख टन मलबा और लगातार हो रही बारिश सबसे बड़ी बाधा बन रही है। जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 3 सितंबर 2026 तक बारिश का यह दौर जारी रहने की संभावना है, जिससे आगे भी भूस्खलन और यातायात बाधित होने का खतरा बना हुआ है। इस संबंध में अधिक जानकारी और अपडेट के लिए आप US Embassy Nepal Natural Disaster Alert पर जा सकते हैं और मूल रिपोर्ट ReliefWeb Nepal Flash Update पर देख सकते हैं।