नेपाल की उद्योग मंत्री गौरी यादव ने दिया इस्तीफा, गैस कारोबारियों पर दिए विवादित बयान के बाद बढ़ा था दबाव

Praggya Singh sabal10 September 20264 min read26 viewsWorld
नेपाल की उद्योग मंत्री गौरी यादव ने दिया इस्तीफा, गैस कारोबारियों पर दिए विवादित बयान के बाद बढ़ा था दबाव

नेपाल की राजनीति में इस समय एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जहाँ देश की उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्री गौरी यादव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना यह इस्तीफा देश के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह को सौंपा है। उनके द्वारा गैस कारोबारियों को लेकर दिए गए कथित धमकी भरे बयान के बाद से सरकार और उद्योगपतियों के बीच टकराव काफी ज्यादा बढ़ गया था, जिसके चलते उनके ऊपर लगातार इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा था। यह पूरा मामला आम जनता से जुड़ा हुआ है क्योंकि इन दिनों रसोई गैस की किल्लत से आम लोग बेहद परेशान चल रहे हैं और देश की राजधानी काठमांडू घाटी में हालात दिन-प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं।

विवादित बयान और गैस कारोबारियों की आपत्तियां

मंत्री गौरी यादव ने बुधवार को आयोजित उद्योग समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया था। इसी बैठक के दौरान उन्होंने गैस उद्योगियों को लेकर एक विवादित और कड़ा बयान दिया था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि देश में इस समय जो गैस का भारी संकट चल रहा है, उसके लिए पूरी तरह से गैस उद्योगी ही जिम्मेदार हैं। उनका यह भी कहना था कि जब तक इन गैस कारोबारियों के ऊपर पूरी सख्ती से कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक देश में गैस की कमी को दूर करना मुमकिन नहीं होगा। मंत्री ने बैठक में यहाँ तक कह दिया था कि नेपाल में इस समय जितने भी कुल 58 गैस उद्योग संचालित हो रहे हैं, उन सभी के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिए जाने चाहिए। उनके मुताबिक देश को चलाने के लिए इतने ज्यादा गैस उद्योगों की कोई आवश्यकता नहीं है और केवल 2 गैस उद्योग ही देश की जरूरत को पूरा करने के लिए काफी होंगे। मंत्री के इस बयान के सामने आने के बाद गैस कारोबारियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और तुरंत प्रधानमंत्री का ध्यान इस पूरे मामले की ओर खींचा।

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राजधानी काठमांडू घाटी में गैस की भारी किल्लत

इस समय काठमांडू घाटी के आम नागरिक खाना पकाने वाली गैस की भारी कमी से जूझ रहे हैं। स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर गैस हासिल करने के लिए दिन और रात लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। बाजार में निर्धारित कीमत जो कि 2,060 नेपाली रुपये है, उसकी जगह आम जनता को एक सिलेंडर के लिए करीब 3,000 रुपये तक चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। आम लोगों का दर्द यह है कि घंटों तक धूप और ठंड में लाइन में खड़े रहने के बाद भी उन्हें गैस नहीं मिल पा रही है। इस लंबी किल्लत को हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा ने और अधिक गंभीर बना दिया है। बीते 14 भदौ को कृष्णभीर में सड़क धंस जाने की वजह से देश में पर्याप्त मात्रा में गैस की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। सरकार वैकल्पिक मार्गों से गैस को उपभोक्ताओं तक पहुँचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में इसकी सहज उपलब्धता अभी तक सुनिश्चित नहीं हो पाई है।

बुनियादी ढांचे की कमी और निजी क्षेत्र पर निर्भरता

नेपाल देश के पास गैस के आयात, भंडारण और वितरण के लिए अपना खुद का कोई भी पर्याप्त बुनियादी ढांचा मौजूद नहीं है। देश के अंदर जितने भी 58 गैस उद्योग चल रहे हैं, वे सभी पूरी तरह से निजी क्षेत्र के हाथों में हैं। सरकारी संस्था नेपाल आयल निगम के स्वामित्व में एक भी गैस बॉटलिंग प्लांट नहीं है। हालांकि, सरकार की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली साल्ट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन कुछ मात्रा में गैस जरूर बेचती है, लेकिन वह बाजार की कुल माँग को पूरा करने की स्थिति में बिल्कुल नहीं है। नेपाल आयल निगम और उद्योग मंत्रालय भले ही लगातार गैस की आपूर्ति होने के आंकड़े सार्वजनिक करते रहते हैं, लेकिन बाजार की वास्तविक और जमीनी स्थिति इन सरकारी आंकड़ों से पूरी तरह अलग दिखाई देती है।

परिवहन के मोर्चे पर भी बड़ी चुनौतियां

नेपाल के पास गैस ढुलाई के लिए अपना एक भी गैस बुलेट टैंकर नहीं है। यहाँ के निजी गैस उद्योगों को भी भारत से गैस का आयात करने के लिए पूरी तरह से भारतीय बुलेट टैंकरों के ऊपर ही निर्भर रहना पड़ता है। इसी वजह से केवल गैस के परिवहन के मद में हर साल करीब 6 अरब नेपाली रुपये देश से बाहर चले जाने का दावा किया जाता है। ऐसे तमाम मुश्किल हालात और चुनौतियों के बीच मंत्री गौरी यादव का गैस कारोबारियों पर सख्ती बरतने वाला बयान आग में घी का काम कर गया और इस विवाद ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद उन्हें आखिरकार अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इस खबर की अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं जहाँ इसे पत्रकार पंकज दास ने रिपोर्ट किया है।

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