नेपाल में मनाया गया कुकुर तिहार, पर्यटकों ने की कुत्तों की पूजा
नेपाल में कुकुर तिहार के मौके पर विदेशी पर्यटकों और पुलिस ने कुत्तों की पूजा की। लियो को 'डॉग ऑफ द ईयर' चुना गया।

काठमांडू (नेपाल): नेपाल में तिहार के दूसरे दिन 'कुकुर तिहार' का उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर स्थानीय लोगों और नेपाल पुलिस के साथ-साथ बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों ने भी कुत्तों की पूजा की और उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट दिया।
नेपाल पुलिस के कैनाइन डिवीजन में सर्विस डॉग्स ने अपनी काबिलियत का प्रदर्शन किया। इन कुत्तों ने आपराधिक मामलों को सुलझाने के लिए सुराग और सबूत खोजने के अपने हुनर दिखाए। इस दौरान कुत्तों को फूलों की माला पहनाई गई और उन्हें तिलक लगाकर विशेष व्यंजन दिए गए।
अगस्त 2026 में आए भोटकोशी बाढ़ के दौरान मलबे में दबे लोगों को खोजने और बचाने में इन कुत्तों ने अहम भूमिका निभाई थी। इस ऑपरेशन में अपनी कुशलता दिखाने वाले 'लियो' नाम के कुत्ते को 'डॉग ऑफ द ईयर' के खिताब से नवाजा गया। बता दें कि उस बाढ़ में अब भी 5000 से ज्यादा लोग लापता हैं।
कैनाइन ऑफिस ने उन कुत्तों को पदक भी दिए जिन्होंने अपराध सुलझाने, सबूत जुटाने, खोज और बचाव कार्यों और नशीले पदार्थों के तस्करों को पकड़ने में बेहतरीन काम किया। यह डिवीजन एक ट्रेनिंग स्कूल के रूप में भी काम करता है, जहाँ देश और विदेश से लाए गए कुत्तों को जांच के लिए तैयार किया जाता है।
उत्सव में शामिल हुए पर्यटक जेरोम ने बताया कि वह खास तौर पर कुत्तों के इस उत्सव को देखने नेपाल आए हैं और कुत्तों की प्रतिभा देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई। वहीं पर्यटक जेन ने कहा कि लोग नेपाल पहाड़ों पर चढ़ने आते हैं, लेकिन वह यहाँ कुत्तों का सम्मान होते देखने आई हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुत्तों को मृत्यु के देवता यम का दूत और रक्षक माना जाता है। ऋग्वेद में जिक्र है कि कुत्तों की माता 'समारा' ने इंद्र की चोरी हुई गायों को वापस लाने में मदद की थी। महाभारत की कथाओं में भी धर्मराज युधिष्ठिर के साथ उनके वफादार कुत्ते का उल्लेख मिलता है, जिनके बिना उन्होंने स्वर्ग में प्रवेश करने से मना कर दिया था।
नेपाल में हर साल यम पंचक या तिहार के दूसरे दिन सुबह-सुबह पालतू और आवारा कुत्तों की पूजा की जाती है। यह परंपरा उनकी वफादारी और ईमानदारी के सम्मान में निभाई जाती है।