नेपाल में त्योहारों की शुरुआत, जीवित देवी कुमारी ने शहर में निकाली पहली भव्य यात्रा.

नेपाल की राजधानी Kathmandu में त्योहारों के मौसम की शुरुआत के साथ ही एक बेहद खास और पारंपरिक नजारा देखने को मिला है। पिछले साल सितंबर में नई रॉयल कुमारी के रूप में चुनी गईं Aryatara Shakya ने इंद्र जात्रा उत्सव के दौरान शहर में अपनी पहली पांच दिवसीय यात्रा शुरू की। इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवसर पर शहर के भीतर भारी उत्साह और उल्लास का माहौल देखा गया, जहां देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने इस पवित्र पल का गवाह बनने के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। लगातार हो रही बारिश के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई और उन्होंने इस प्राचीन परंपरा में पूरी श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया।
इंद्र जात्रा उत्सव और तीन जीवित देवताओं की रथ यात्रा
इस पारंपरिक उत्सव के दौरान नई जीवित देवी कुमारी के अलावा दो अन्य जीवित देवता Ganesh और Bhairab भी काठमांडू के अंदरूनी इलाकों में रथ यात्रा पर निकले। नेपाली पंचांग के अनुसार भद्र शुक्ल चतुर्दशी से शुरू होने वाला यह वार्षिक उत्सव एक सप्ताह तक चलता है, जिसमें तीनों जीवित देवताओं को मानव रूप में तीन अलग-अलग रथों पर सवार करके पूरे शहर में घुमाया जाता है। इस दौरान नेपाल की राजधानी के ऐतिहासिक स्थल Kathmandu Durbar Square, जो कि एक UNESCO World Heritage Site है, उसके परिसर में भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने मौसम की परवाह किए बिना जीवित देवी-देवताओं के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
कुमारी चुनने की कठिन और प्राचीन धार्मिक प्रक्रिया
नेपाल में परंपरा के अनुसार काठमांडू घाटी के मूल निवासी न्यूवार समुदाय से ही एक छोटी बच्ची को कुमारी के रूप में चुना जाता है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए बच्ची को कई कठिन धार्मिक परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। जब पुरानी कुमारी के यौवन की आयु तक पहुंचने का समय आता है, तब नई कुमारी की तलाश शुरू होती है। इस चयन प्रक्रिया में हिंदू और बौद्ध धर्म दोनों की परंपराओं का मिश्रण देखने को मिलता है। बच्ची के चयन के दौरान उसके अच्छे स्वास्थ्य, शरीर पर किसी भी प्रकार के निशान या खरोंच न होने, त्वचा के बेदाग होने, मासिक धर्म न शुरू होने और दांत टूटे न होने जैसी प्राथमिक विशेषताओं की जांच की जाती है।
32 शारीरिक पूर्णताएं और साहस की कड़ी परीक्षा
प्राथमिक आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद बच्ची की कुल 32 strict body perfections यानी कठोर शारीरिक पूर्णताओं की जांच की जाती है। इसमें बरगद के पेड़ जैसा शरीर, गाय जैसी पलकें, शंख जैसी गर्दन, शेर जैसी छाती, बतक जैसी नरम और स्पष्ट आवाज, राजा जैसी कुंडली, निडरता के लक्षण, सीधे काले बाल, गहरी आंखें, कोमल हाथ-पैर, हिरण जैसी जांघें और छोटी व नम जीभ जैसे गुण देखे जाते हैं। इसके अलावा बच्ची को साहस की परीक्षा से भी गुजरना पड़ता है, जिसमें उसे कई बलि दिए गए भैंसों और खून के बीच नाचते हुए नकाबपोश आदमियों के सामने ले जाया जाता है। यदि बच्ची में डर का कोई भी लक्षण दिखाई देता है, तो उसे देवी तालेजू का अवतार बनने के योग्य नहीं माना जाता है।
कुमारी घर में निवास और साल में सीमित बाहर आना
एक बार चुनी जाने के बाद जीवित देवी अपने माता-पिता के घर को छोड़कर पुराने राजमहल जैसी इमारत Kumari Ghar में रहने के लिए चली जाती हैं, जहां आधुनिक सुविधाएं नहीं होती हैं। इसके बाद माता-पिता अपनी बेटी से नियमित रूप से नहीं मिल सकते हैं और वे अपनी बच्ची को साल में केवल करीब 13 times ही देख पाते हैं जब कुमारी विशेष आयोजनों और कार्यक्रमों के लिए बाहर आती हैं। इनमें से Indra Jatra सबसे प्रमुख अवसरों में से एक है, जब जीवित देवी अपने निवास स्थान से बाहर आकर भक्तों को दर्शन देती हैं। लोक कथाओं के अनुसार इंद्र जात्रा उत्सव भगवान इंद्र के पुत्र जयंत को राक्षसों से छुड़ाने की खुशी में देवताओं की जीत के रूप में मनाया जाता है।
शीर्ष नेताओं की उपस्थिति और उत्सव का उल्लास
इस भव्य और ऐतिहासिक अवसर पर नेपाल के राष्ट्रपति Ram Chandra Paudel, उपराष्ट्रपति Ram Sahaya Prasad Yadav, कार्यवाहक प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री Swarnim Wagle, गृह मंत्री Sudhan Gurung और काठमांडू की कार्यवाहक मेयर Sunita Dangol सहित कई बड़े अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इन सभी ने जुलूस को देखा और जीवित देवी-देवताओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए नमन किया। बारिश के बावजूद नेपाल के इस पारंपरिक पर्व में लोगों का भारी जनसैलाब यह साबित करता है कि वहां की जनता अपनी प्राचीन संस्कृति और मान्यताओं से कितना गहरा जुड़ाव रखती है।